हिज्बुल्लाह की नौसैनिक ताकत देख क्यों उड़े इजरायल के होश: चीन कनेक्शन?

इजरायल वैसे तो कई मोर्चों पर जंग लड़ रहा है लेकिन गाजा और लेबनान में उसके सैनिक जमीनी ऑपरेशन को अंजाम दे रहे हैं और लगातार ताबड़तोड़ हमले कर रहे हैं। लेबनान के हिज्बुल्लाह आतंकी संगठन भी इजरायल पर पलटवार कर रहे हैं। लेबनान में हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर इजरायली हमलों को करीब एक महीना होने को है लेकिन हिज्बुल्लाह पीछे हटता हुआ नजर नहीं आ रहा है। इसके पीछे की वजह उसे ईरान से मिल रहा समर्थन है। ईरान लंबे समय से हिज्बुल्लाह लड़ाकों को धन, हथियार और प्रशिक्षण देता रहा है। अब इजरायली नौसेना के अधिकारियों ने जो सूचना दी है, उससे इजरायल के होश उड़ गए हैं।

इजरायली नौसेना के अधिकारियों का कहना है कि हिज्बुल्लाह के पास अभी भी एक सक्रिय नौसेना शाखा है, जिसके पास जहाज रोधी मिसाइलें और संभावित रूप से नौसैनिक बैलिस्टिक मिसाइलें भी हैं। हिज्बुल्लाह की इसी ताकत का डर इजरायल को सता रहा है। पिछले एक दशक में इजरायली सुरक्षा बलों (IDF) ने हिज़्बुल्लाह की नौसैनिक क्षमताओं पर बारीकी से नजर रखी है। जेरुसलम पोस्ट के मुताबिक, IDF की रिपोर्ट में कहा गया है कि हिज्बुल्लाह के पास रूस निर्मित सुपरसोनिक याखोंट मिसाइल भी है, जिसे ‘पश्चिमी बेड़े का दुःस्वप्न’ कहा जाता है। रक्षा आकलन के अनुसार, यह मिसाइल रूस से सीरिया को बेची गई थी और फिर हिज़्बुल्लाह को हस्तांतरित कर दी गई।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान की मदद से हिज्बुल्लाह ने एक गुप्त नौसैनिक इकाई भी तैयार कर रखी है। हालांकि आईडीएफ ने हाल के वर्षों में इसकी कुछ क्षमताओं को सफलतापूर्वक कम किया है लेकिन अभी भी हिज्बुल्लाह की नौसेना इकाई तटीय छापे और युद्धपोतों पर हमला करने की क्षमता रखते हैं। उनके पास उन्नत मिसाइलों और रडार भी हैं। इनमें से कुछ रडार और मिसाइल यमन के हूती विद्रोहियों के समान हैं। इस बात से इजरायल की चिंता और बढ़ गई हैं कि उसके दो छोर पर बैठे दोनों दुश्मनों के पास घातक हथियार हैं।

हालांकि, इजरायली नौसेना के अधिकारियों का मानना ​​है कि IDF की सतर्कता के कारण लेबनानी जलक्षेत्र के पास हिजबुल्लाह अचानक नौसैनिक हमला नहीं कर सकेगा। बता दें कि 2006 में दूसरे लेबनान युद्ध के दौरान हिजबुल्लाह ने आईएनएस हनीत पर सी-802 मिसाइल से हमला किया था। और तब से हिज्बुल्लाह ने अपने हथियारों के जखीरे को और उन्नत कर लिया है। IDF को इस बात की भी चिंता है कि हाल के कुछ महीनों में ईरान ने हिज्बुल्लाह को बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन की सप्लाई की है। इसके अलावा हूतियों के हमले के पैटर्न और उसमें इस्तेमाल मिसाइल ने भी इजरायल समेत पश्चिमी देशों का ध्यान खींचा है।

एक इजरायली फील्ड विशेषज्ञ के मुताबिक, “हूती विद्रोहियों ने हाल के दिनों में एक नौसैनिक बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया था। इस हमले ने कई पश्चिमी खुफिया एजेंसियों को चौंका दिया क्योंकि इसमें लक्ष्य को प्राप्त करने की इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल क्षमता है। यह एक खतरनाक संकेत है। ऐसे मिसाइल बहुत ऊंचाई से आते हैं और जहाज को एक तीव्र कोण बनाकर हमला करता है।” उन्होंने बताया कि आयरन डोम ही इससे निपट सकता है। इससे इजरायल को एक नए किस्म की चुनौतीपूर्ण खतरे का सामना करना पड़ रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के पास भी इसी तरह की मिसाइल है। माना जा रहा है कि ईरान ने इस तकनीकी को हासिल कर ना सिर्फ ऐसी घातक मिसाइलें विकसित की हैं, बल्कि उसे हूतियों को सप्लाई भी किया है, ताकि इजरायल को चारों ओर से घेरा जा सके। अभी हाल ही में हिज्बुल्लाह के ड्रोन ने इजरायली सुरक्षा कवच आयरन डोम के चकमा देकर इजरायली सुरक्षा बलों के ठिकाने पर हमला किया था और अब समंदर में नौसेनिक इकाई के सहारे इजरायल को चेकमेट दे रहा है।

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