रायपुर में 30 कुत्तों की रोजाना नसबंदी, नगर निगम की बड़ी पहल

रायपुर नगर निगम की ओर से एक बड़ी पहल शुरू की गई है, जिसके तहत शहर में रोजाना करीब 30 कुत्तों की नसबंदी की जा रही है। इस अभियान का उद्देश्य शहरी क्षेत्र में कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करना और उनके स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है। महापौर मीनल चौबे, स्वास्थ्य विभाग अध्यक्ष गायत्री सुनील चंद्राकर, और आयुक्त विश्वदीप के दिशा-निर्देशों पर यह कार्य चल रहा है, और इसे एनिमल वेलफेयर सोसायटी हरियाणा द्वारा संचालित किया जा रहा है।

सोनडोंगरी में एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर का संचालन

नगर निगम रायपुर ने सोनडोंगरी क्षेत्र में एक एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर स्थापित किया है, जहां कुत्तों की नसबंदी और देखभाल का काम चल रहा है। अब तक इस केंद्र के माध्यम से 413 कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है। यह प्रक्रिया प्रतिदिन 15 कुत्तों तक बढ़ाई जा रही है, जिन्हें रायपुर नगर निगम के विभिन्न क्षेत्रों से पकड़कर लाया जाता है। इस प्रक्रिया के तहत कुत्तों को वेक्सिनेशन, डी-वॉर्मिंग और अन्य जरूरी चिकित्सा सेवा भी प्रदान की जाती है।

औचक निरीक्षण और व्यवस्थाओं का मूल्यांकन

नगर निगम के अपर आयुक्त स्वास्थ्य विनोद पाण्डेय ने हाल ही में सोनडोंगरी के एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने ऑपरेशन थियेटर, चिकित्सकों के प्रबंधन, कुत्तों के वेक्सीनेशन और डी-वॉर्मिंग कार्य सहित सभी व्यवस्थाओं का आकलन किया। पाण्डेय ने एजेंसी के प्रतिनिधियों को उचित निर्देश दिए ताकि केंद्र की गतिविधियों में कोई कमी न हो और यह कार्य सुचारू रूप से चलता रहे।

आधिकारिक आंकड़े और प्रगति

रायपुर नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग द्वारा बैरन बाजार में भी एक और एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर संचालित किया जा रहा है। इन दोनों केंद्रों का मिलाकर रायपुर नगर निगम क्षेत्र में रोजाना लगभग 30 कुत्तों की नसबंदी की जा रही है। इस अभियान के तहत कुत्तों को पकड़ने के लिए डॉग कैचर टीम को नियुक्त किया गया है, जो कुत्तों को सही तरीके से पकड़कर उन्हें केंद्र तक लाती है। यह कार्य जोन 8 के स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार मॉनिटर किया जा रहा है, ताकि सब कुछ योजना के मुताबिक चल सके।

नसबंदी के फायदे

कुत्तों की नसबंदी से ना केवल उनकी संख्या को नियंत्रित किया जा सकता है, बल्कि इससे कुत्तों की स्वास्थ्य समस्याओं में भी कमी आती है। नसबंदी से कुत्तों के बीच की बीमारी फैलने की संभावना भी कम होती है, और यह शहरी सफाई व्यवस्था को भी सुधारने में मदद करती है।

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