फूलपुर उपचुनाव: 2 पूर्व विधायकों संग राजनीति का नया खिलाड़ी भर रहा दम, जानें समीकरण

फूलपुर के उप चुनाव में भाजपा व सपा से बतौर प्रत्याशी दो पूर्व विधायक अपनी-अपनी जीत का दम भर रहे हैं तो बसपा से भाग्य आजमा रहे प्रत्याशी राजनीति के नए खिलाड़ी हैं। भाजपा प्रत्याशी दीपक पटेल 44 वर्ष के हैं तो सपा के मुज्तबा सिद्दीकी 68 वर्ष के हैं पर इनमें एक समानता यह है कि दोनों पूर्व में बसपा से विधायक निर्वाचित हो चुके हैं। दीपक 2012 में करछना से बसपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे तो मुज्तबा बतौर बसपा प्रत्याशी दो बार सोरांव तो एक बार फूलपुर के बगल की प्रतापपुर सीट से विधायक रह चुके हैं। बसपा ने नामांकन से कुछ दिन पूर्व प्रत्याशी बदलते हुए कारोबारी जितेंद्र कुमार सिंह को प्रत्याशी बनाया था, जिनका यह पहला विधानसभा चुनाव है।

भाजपा प्रत्याशी दीपक पटेल की मां केशरी देवी पटेल फूलपुर संसदीय सीट से सांसद के साथ ही लंबे समय तक जिला पंचायत की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। पांच साल के संसदीय कार्यकाल में मां के साथ दीपक भी क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ उनके पक्ष में दो चुनावी सभाएं कर चुके हैं।

हालांकि सीएम ढाई महीने में तीन बार फूलपुर क्षेत्र में आए। कभी बसपा प्रमुख मायावती के वफादार रहे मुज्तबा सिद्दीकी 2022 के विधानसभा चुनाव में भी सपा प्रत्याशी के तौर पर इस सीट से लड़े थे। गत चुनाव में वह भाजपा के प्रवीण पटेल से 2732 मतों से हार गए थे। इस साल हुए लोकसभा चुनाव में सपा को इस विधानसभा क्षेत्र में सर्वाधिक मत मिले थे। सपा के परंपरागत यादव और सजातीय मुस्लिम मतों के साथ ही अन्य जातियों के समर्थन का दावा करते हुए मुज्तबा मैदान में डटे हुए हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 14 नवंबर को उनके पक्ष में जनसभा की थी। कांग्रेस के गंगापार के जिलाध्यक्ष सुरेश यादव पार्टी से बगावत कर निर्दल प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में हैं। बसपा के परंपरागत मतों के साथ ही सजातीय मतों को खुद के साथ बताते हुए बसपा के जितेंद्र कुमार सिंह पार्टी पदाधिकारियों संग जनसंपर्क में जुटे हैं।

क्षेत्र की विशेषता

यह जिले का सबसे तेजी से विकसित होता इलाका है। इसमें आने वाले झूंसी में गोविन्द बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान, हरिश्चंद्र रिसर्च इंस्टीट्यूट जैसे संस्थान हैं तो गंगा के किनारे उलटा किला भी स्थित है।

यूपी के साथ ही देश के अन्य हिस्सों में भी खाद की आपूर्ति करने वाला इफको का प्लांट इसी क्षेत्र में है तो सहसो का सबसे बड़ा चौराहा भी इस क्षेत्र की अलग पहचान है।

सर्वाधिक चार बार जीती सपा

फूलपुर संसदीय क्षेत्र की पांच विधानसभा सीटों में से एक सीट का नाम भी फूलपुर है, जिसे परिसीमन से पूर्व झूंसी के नाम से जाना जाता था। इस सीट पर पहला चुनाव 1974 में हुआ था, तब से 2022 तक हुए तेरह विधानसभा चुनावों में इस क्षेत्र से भाजपा, कांग्रेस और जनता दल के प्रत्याशी दो-दो बार चुनाव जीते जबकि जनता पार्टी, जनता पार्टी (सेकुलर ) तथा बसपा को एक-एक और सपा को सर्वाधिक चार अवसर मिले।

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