108 एम्बुलेंस
छत्तीसगढ़ के एमसीबी (मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर) जिले से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने एक बार फिर आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हार्ट अटैक से पीड़ित एक महिला को बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया, लेकिन समय पर एम्बुलेंस नहीं मिलने के कारण उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों में भारी नाराजगी है और स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं को लेकर बहस तेज हो गई है।
क्या है पूरा मामला?
झगराखांड निवासी श्यामा बाई की तबीयत अचानक बिगड़ने पर उन्हें जिला अस्पताल मनेंद्रगढ़ में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने जांच के बाद उनकी स्थिति गंभीर बताते हुए उन्हें रायपुर के बड़े अस्पताल में रेफर कर दिया।
बताया जा रहा है कि:
- शाम करीब 6 बजे मरीज को रायपुर रेफर किया गया।
- परिजनों ने तत्काल एम्बुलेंस की मांग की।
- 108 एम्बुलेंस सेवा और अस्पताल प्रशासन से लगातार संपर्क किया गया।
- कई घंटों तक एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी।
- रात लगभग 12 बजे एम्बुलेंस पहुंची।
- एम्बुलेंस में शिफ्ट करने के दौरान ही महिला की मौत हो गई।
परिजनों का आरोप है कि यदि समय पर वाहन उपलब्ध कराया जाता तो मरीज की जान बच सकती थी।
अस्पताल परिसर में हंगामा
घटना के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा।
उन्होंने:
- अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन किया।
- स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नारेबाजी की।
- जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठाई।
- शव को एम्बुलेंस में रखकर प्रदर्शन किया।
स्थिति को देखते हुए अस्पताल परिसर में पुलिस बल भी तैनात करना पड़ा।
108 सेवा पर उठे सवाल
इस घटना का सबसे गंभीर पहलू यह है कि अस्पताल परिसर में एम्बुलेंस उपलब्ध होने के बावजूद समय पर मरीज को सेवा नहीं मिल पाई।
परिजनों के अनुसार:
- कई बार कॉल करने के बावजूद संपर्क नहीं हो पाया।
- संपर्क होने के बाद भी वाहन पहुंचने में अत्यधिक देरी हुई।
- आपातकालीन स्थिति में मरीज को समय पर परिवहन नहीं मिल सका।
यही कारण है कि अब 108 एम्बुलेंस सेवा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने बनाई जांच समिति
घटना के बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया।
अस्पताल अधीक्षक ने बताया कि:
- मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है।
- टीम में दो डॉक्टर और एक प्रशासनिक कर्मचारी शामिल हैं।
- एम्बुलेंस सेवा, कॉल रिस्पॉन्स और अस्पताल की भूमिका की जांच होगी।
- लापरवाही साबित होने पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
भारत में हार्ट अटैक जैसे मामलों में “गोल्डन ऑवर” यानी शुरुआती एक घंटा बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार समय पर इलाज मिलने से मरीज की जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
इस घटना ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं:
- क्या ग्रामीण और दूरस्थ जिलों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं पर्याप्त हैं?
- 108 एम्बुलेंस सेवा की निगरानी कितनी प्रभावी है?
- रेफर मरीजों के लिए तत्काल परिवहन व्यवस्था क्यों नहीं हो पाती?
- स्वास्थ्य संस्थानों में जवाबदेही कैसे तय होगी?
आगे क्या?
स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। यदि जांच में लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई हो सकती है। वहीं यह मामला राज्य की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की आवश्यकता की ओर भी संकेत करता है।
इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि आपातकालीन चिकित्सा में कुछ घंटों की देरी भी किसी की जिंदगी और मौत के बीच का अंतर बन सकती है।