RBI Governor की बड़ी चेतावनी: वैश्विक सप्लाई चेन संकट से बढ़ सकता है महंगाई का खतरा, अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहा बड़ा जोखिम

RBI Governor

मुंबई। भारतीय अर्थव्यवस्था फिलहाल मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है, लेकिन वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान भविष्य के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को स्पष्ट कहा कि वर्तमान समय में अर्थव्यवस्था के सामने सबसे बड़ा जोखिम वैश्विक सप्लाई चेन में पैदा हो रहा बिखराव है, जिसका सीधा असर महंगाई और आर्थिक वृद्धि पर पड़ सकता है।

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की द्वैमासिक समीक्षा बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में गवर्नर ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और केंद्रीय बैंक संभावित जोखिमों को लेकर सतर्क है।

सप्लाई चेन संकट क्यों बना सबसे बड़ा खतरा?

दुनिया के कई हिस्सों में जारी भू-राजनीतिक संघर्षों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वस्तुओं की आपूर्ति को प्रभावित किया है। ऐसे हालात में उत्पादन लागत बढ़ती है और इसका असर सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचता है।

आरबीआई गवर्नर के अनुसार प्रमुख जोखिम हैं:

  • वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव
  • पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष
  • आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान
  • मानसून कमजोर रहने की आशंका
  • आयातित वस्तुओं की बढ़ती लागत

उन्होंने कहा कि जब तक वैश्विक स्तर पर स्थिरता नहीं आती और आपूर्ति श्रृंखलाएं सामान्य नहीं होतीं, तब तक महंगाई का दबाव बना रह सकता है।

महंगाई पर लगातार नजर रखेगा RBI

संजय मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई केवल आंकड़ों पर ही नहीं बल्कि आम परिवारों की महंगाई संबंधी अपेक्षाओं पर भी नजर रखता है।

महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए RBI:

  • उपभोक्ता सर्वेक्षणों का विश्लेषण करता है
  • वैश्विक बाजार की गतिविधियों पर नजर रखता है
  • कच्चे तेल की कीमतों की समीक्षा करता है
  • घरेलू मांग और आपूर्ति की स्थिति का आकलन करता है

उन्होंने बताया कि हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिली है, जिससे महंगाई पर दबाव कुछ कम हुआ है।

रेपो रेट में नहीं हुआ कोई बदलाव

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने नीतिगत ब्याज दरों को फिलहाल स्थिर रखने का फैसला किया है।

मुख्य निर्णय:

  • रेपो रेट: 5.25 प्रतिशत
  • एमएसएफ दर: 5.50 प्रतिशत
  • बैंक रेट: 5.50 प्रतिशत

केंद्रीय बैंक का मानना है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में स्थिर ब्याज दरें विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद करेंगी।

GDP ग्रोथ को लेकर सकारात्मक संकेत

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। यह दर्शाता है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत गति से आगे बढ़ रही है।

वहीं खुदरा महंगाई दर 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो आरबीआई के निर्धारित दायरे के भीतर है।

FDI निवेश को लेकर भी अच्छी खबर

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि निजी निवेश का माहौल स्वस्थ बना हुआ है और विदेशी निवेशकों का भरोसा भारत पर लगातार बढ़ रहा है।

महत्वपूर्ण आंकड़े:

  • पिछले वित्त वर्ष में FDI प्रवाह: 95 अरब डॉलर
  • चालू वित्त वर्ष का अनुमान: 100 से 120 अरब डॉलर

उन्होंने विश्वास जताया कि भारत में विदेशी निवेश का प्रवाह आने वाले वर्षों में भी मजबूत बना रहेगा।

रुपये और विदेशी मुद्रा भंडार पर RBI का भरोसा

रुपये की विनिमय दर को लेकर पूछे गए सवाल पर गवर्नर ने कहा कि आरबीआई किसी विशेष स्तर को बनाए रखने का प्रयास नहीं करता, लेकिन बाजार में अनावश्यक सट्टेबाजी और अस्थिरता पर कड़ी नजर रखी जाती है।

उन्होंने कहा कि:

  • भारत के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है
  • आरबीआई किसी भी असामान्य उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए तैयार है
  • सोने के भंडार में कोई कमी नहीं आई है
  • देश में नकदी की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है

अर्थव्यवस्था मजबूत, लेकिन सतर्क रहने की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है, लेकिन वैश्विक घटनाक्रमों का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। ऐसे में सप्लाई चेन, कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक परिस्थितियां आने वाले महीनों में भारतीय अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।

आरबीआई का संदेश साफ है—भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत है, लेकिन वैश्विक जोखिमों को देखते हुए सतर्कता और संतुलित नीतियां बेहद जरूरी हैं।

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