नायब तहसीलदार से मारपीट के विरोध में ठप पड़े राजस्व काम, 2000 से ज्यादा मामले अटके, आम जनता परेशान

Revenue Strike

छत्तीसगढ़ में राजस्व व्यवस्था इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रही है। सरगुजा में पदस्थ एक नायब तहसीलदार के साथ कथित मारपीट की घटना के विरोध में शुरू हुई कलमबंद हड़ताल का असर अब पूरे प्रदेश में दिखाई देने लगा है। बिलासपुर सहित कई जिलों में राजस्व कार्य लगभग ठप हो चुके हैं, जिससे हजारों नागरिकों के जरूरी काम प्रभावित हो रहे हैं।

हड़ताल के चलते जमीन संबंधी मामलों से लेकर जाति, आय, निवास और ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र तक की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। पिछले तीन दिनों में सिर्फ बिलासपुर जिले में ही 2000 से अधिक मामलों पर असर पड़ने की जानकारी सामने आई है।

11 तहसीलों में कामकाज प्रभावित

बिलासपुर जिले की 11 तहसीलों में राजस्व अधिकारियों के आंदोलन का सीधा असर देखने को मिल रहा है।

स्थिति यह है कि:

  • न्यायालयीन सुनवाई स्थगित हो रही है।
  • नामांतरण और सीमांकन के प्रकरण लंबित हैं।
  • रिकॉर्ड दुरुस्ती के मामलों में देरी हो रही है।
  • प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया प्रभावित है।
  • नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

अकेले बिलासपुर तहसील में करीब 450 मामलों की सुनवाई तीन दिनों में नहीं हो सकी।

पटवारियों के समर्थन से बढ़ा आंदोलन

इस आंदोलन को अब अन्य कर्मचारी संगठनों का भी समर्थन मिलने लगा है।

समर्थन देने वाले प्रमुख संगठन:

  • छत्तीसगढ़ राजस्व पटवारी संघ
  • राज्य स्तरीय छात्रावास अधीक्षक संघ

पटवारियों के आंदोलन में शामिल होने से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भूमि रिकॉर्ड से जुड़े अधिकांश कार्य प्रभावित हो गए हैं।

सबसे ज्यादा असर किन सेवाओं पर?

हड़ताल के कारण आम लोगों को जिन सेवाओं में सबसे अधिक परेशानी हो रही है, उनमें शामिल हैं:

  • खाता विभाजन
  • नामांतरण
  • सीमांकन
  • भू-अभिलेख सुधार
  • जाति प्रमाण पत्र
  • आय प्रमाण पत्र
  • निवास प्रमाण पत्र
  • ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र

छात्रों, नौकरी आवेदकों और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाले लोगों पर इसका विशेष प्रभाव पड़ रहा है।

क्यों नाराज हैं अधिकारी?

छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ का कहना है कि यह केवल एक अधिकारी के साथ हुई घटना का विरोध नहीं है, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा बड़ा मुद्दा है।

संघ की प्रमुख मांगें:

  • आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी
  • दोषियों पर सख्त कार्रवाई
  • अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना
  • कार्यालयीन संसाधनों में सुधार
  • स्टाफ की कमी दूर करना

संघ ने स्पष्ट किया है कि ठोस कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

4 जून से आंदोलन और बढ़ सकता है

मामले को लेकर राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी संघ ने भी नाराजगी जताई है।

फिलहाल अधिकारी:

  • काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज करा रहे हैं।
  • मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंप चुके हैं।
  • दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी भी हड़ताल पर जा सकते हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है।

आम जनता पर पड़ रहा सीधा असर

हड़ताल का सबसे बड़ा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। कई लोग अपने जरूरी दस्तावेजों और जमीन संबंधी कार्यों के लिए तहसीलों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिल रही।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आंदोलन जल्द समाप्त नहीं हुआ तो लंबित मामलों का बोझ कई गुना बढ़ सकता है और राजस्व व्यवस्था सामान्य होने में लंबा समय लग सकता है।

फिलहाल सभी की नजर प्रशासन और कर्मचारी संगठनों के बीच होने वाली संभावित वार्ता पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे का समाधान होता है या आंदोलन और तेज होता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

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