नवा रायपुर: छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर में मंत्रालय कर्मचारियों को लाने-ले जाने वाली स्टाफ बस में अचानक आग लगने की घटना के बाद कर्मचारियों का आक्रोश फूट पड़ा है। इस खतरनाक हादसे के विरोध में बड़ी संख्या में कर्मचारी मंत्रालय के बाहर एकत्र हुए और बसों की खस्ताहाल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कर्मचारियों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने के साथ ही सभी स्टाफ बसों की फिटनेस की नए सिरे से जांच की मांग की है।
पुरानी और कंडम बसों के संचालन का आरोप
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का सीधा आरोप है कि मंत्रालय के लिए लगाई जाने वाली ज्यादातर स्टाफ बसें काफी पुरानी और कंडम हो चुकी हैं। इस समस्या को लेकर वे पहले भी कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत कर चुके हैं। कर्मचारियों ने बताया कि सफर के दौरान कई बार बसें रास्ते में ही 4 से 5 बार बंद हो जाती थीं, जिससे हमेशा एक बड़ा हादसा होने का खतरा बना रहता था।
फिटनेस जांच पर उठे सवाल, कमेटी के गठन की मांग
कर्मचारियों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की घटना सामने आई है। संघ की ओर से लगातार अधिकारियों को बसों की जर्जर स्थिति से अवगत कराया जाता रहा है, लेकिन इसे नजरअंदाज किया गया।
- परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल: कर्मचारियों ने सवाल उठाया है कि आखिर कागजों पर होने वाली बसों की फिटनेस जांच महज औपचारिकता है या वाकई तकनीकी परीक्षण होता है?
- कमेटी का गठन: इस घटना की जवाबदेही तय करने के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी के गठन की बात सामने आई है। इस कमेटी में मंत्रालय के कर्मचारियों के अलावा NRDA, निगम, बस ऑपरेटर और संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल होंगे।
कर्मचारी संघ के साथ होने वाली इस बैठक में यह तय किया जाएगा कि इस गंभीर हादसे की जिम्मेदारी किसकी है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम कैसे किए जाएं। कर्मचारियों ने मांग की है कि या तो नई बसें चलाई जाएं या मौजूदा बसों की नियमित रूप से सख्त तकनीकी जांच सुनिश्चित की जाए।