1 लीटर इथेनॉल को बनाने में कितने गन्ने का होगा इस्तेमाल, जानें क्या है पूरा प्रोसेस?

 पेट्रोल और डीजल की कीमतें एक बड़ी चिंता बनी हुई हैं. ऐसे में इथेनॉल भारत के सबसे जरूरी वैकल्पिक ईंधनों में से एक बनकर उभरा है. सरकार कच्चे तेल के इंपोर्ट पर निर्भरता को कम करने और किसानों की मदद करने के लिए पेट्रोल में इथेनॉल की मिलावट तेजी से बढ़ा रही है. क्योंकि यह मुख्य रूप से गन्ने और उससे बनने वाले उत्पादों से तैयार किया जाता है इस वजह से बायोफ्यूल की बढ़ती मांग देश भर के गन्ना किसानों के लिए इनकम के नए अवसर पैदा कर रही है. आइए जानते हैं कि एक लीटर इथेनॉल को बनाने के लिए कितना गन्ना चाहिए.

1 लीटर इथेनॉल बनाने के लिए कितना गन्ना लगेगा?

जब कच्चे माल के तौर पर सीधे गन्ने के रस का इस्तेमाल किया जाता है तो 1 लीटर शुद्ध इथेनॉल बनाने के लिए लगभग 12 से 15 किलोग्राम गन्ने की जरूरत होती है. सीधे रस आधारित उत्पादन से 1 टन गन्ने से लगभग 70 से 84 लीटर इथेनॉल मिल सकता है. हालांकि जब पहले चीनी निकल जाती है और फिर शीरे से इथेनॉल बनाया जाता है तो उत्पादन काफी कम होता है. C हैवी मोलासेस तरीके में 1 टन गन्ने से आमतौर पर सिर्फ 10 से 11 लीटर इथेनॉल ही बनता है.

इथेनॉल उत्पादन के तरीके 

चीनी मिलें सरकारी नीति, बाजार की मांग और चीनी उत्पादन के लक्ष्यों के आधार पर उत्पादन के अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करती हैं. एक तरीका है सीधे गन्ने के रस को इथेनॉल उत्पादन के लिए भेजना. इसमें चीनी नहीं बनाई जाती, जिस वजह से फसल से सबसे ज्यादा इथेनॉल मिलता है. दूसरा तरीका है रस से कुछ चीनी निकाल ली जाती है. इसी के साथ बचे हुए गाढ़े सिरप का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने के लिए किया जाता है. तीसरा तरीका है बचे हुए शीरे का इथेनॉल बनाने के लिए इस्तेमाल करना. 

क्या होती है प्रक्रिया?

यह प्रक्रिया तब शुरू होती है जब काटा हुआ गन्ना चीनी मिल में पहुंचाया जाता है. गन्ने को भारी क्रेशर में डाल दिया जाता है जो रस निचोड़कर निकालते हैं.  जब शीरे से इथेनॉल बनाया जाता है तो रस से पहले चीनी बनाई जाती है. चीनी के क्रिस्टल अलग होने के बाद बचा हुआ गाढ़ा तरल इथेनॉल उत्पादन के लिए कच्चा माल बन जाता है. 

इसके बाद निकाले गए जूस को बड़े फर्मेंटेशन टैंक में डाला जाता है. इस मिश्रण में यीस्ट की खास किस्में मिलाई जाती हैं. यह प्राकृतिक शुगर को अल्कोहल और कार्बन डाइऑक्साइड में बदल देता है. समय के साथ इस बायोलॉजिकल प्रक्रिया से एक लिक्विड बनता है जिसे वॉश कहा जाता है. इसमें आमतौर पर लगभग 8% से 10% अल्कोहल होता है. 

इसके बाद फर्मेंट किए गए वॉश को डिस्टिलेशन प्लांट भेजा जाता है. मिश्रण को गर्म किया जाता है जिस वजह से पानी से पहले अल्कोहल भाप बनकर उड़ने लगता है. अल्कोहल की इस भाप को इकट्ठा करके ठंडा किया जाता है और वापस लिक्विड के रूप में बदल दिया जाता है. इससे लगभग 95% शुद्ध इथेनॉल मिलता है. 

फ्यूल ग्रेड इथेनॉल बनाना 

पेट्रोल में मिलाने के लिए इथेनॉल की शुद्धता 99.8% से ज्यादा होनी चाहिए. इस स्टैंडर्ड तक पहुंचाने के लिए मॉलिक्युलर सीव जैसी एडवांस्ड डिहाइड्रेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है. इससे पानी की बची-खुची मात्रा भी निकल जाती है.

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