32 साल बाद शिकंजे में कातिल: आश्रम में दो साध्वियों की गला घोंटकर की थी हत्या, फर्जी पहचान छिपाकर फैक्ट्री में काट रहा था फरारी

दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से क्राइम ब्रांच ने एक ऐसा सनसनीखेज खुलासा किया है, जिसने तीन दशक पुरानी यादें ताजा कर दी हैं। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने करीब 32 साल पुराने डबल मर्डर और डकैती के एक फरार आरोपी को धर दबोचा है। आरोपी पिछले तीन दशकों से पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फर्जी पहचान के साथ अलग-अलग जगहों पर छिपकर रह रहा था और हाल ही में एक फैक्ट्री में पैकेजिंग मजदूर के रूप में काम कर रहा था।

साल 1994 की वह खौफनाक वारदात

यह पूरा मामला साल 1994 का है। पूर्वी दिल्ली के एक आध्यात्मिक आश्रम में लूटपाट के दौरान दो साध्वियों की बेरहमी से गला घोंटकर हत्या कर दी गई थी। हमलावरों ने आश्रम से नकदी, जेवरात और अन्य कीमती सामान लूट लिया था। इस खौफनाक वारदात के बाद शकरपुर थाने में आईपीसी की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

पुलिस जांच के मुताबिक, पकड़ा गया मुख्य आरोपी ललित (48) इस दोहरे हत्याकांड और लूटपाट में सीधे तौर पर शामिल था। उस पर आरोप है कि उसने खुद एक साध्वी का गला घोंटने में अहम भूमिका निभाई थी और वारदात के बाद उसे लूटे गए माल में से अपना हिस्सा भी मिला था।

तीन साथी पहले पकड़े गए, पर ललित रहा फरार

शुरुआती जांच के दौरान पुलिस ने इस मामले में तीन सह-आरोपियों—सुनील कुमार, दिलीप राम और सुशील को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन मुख्य आरोपी ललित पुलिस के हाथ नहीं आया। कोर्ट ने 26 अक्टूबर 1995 को उसे आधिकारिक तौर पर भगोड़ा घोषित कर दिया था। इसके बाद से दिल्ली पुलिस की तलाश लगातार जारी थी।

फर्जी पहचान और बिहार से लेकर दिल्ली तक फरारी के 32 साल

पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि वारदात को अंजाम देने के बाद ललित करीब 6 साल (यानी साल 2000 तक) बिहार के अलग-अलग इलाकों में छिपकर रहा और वहां छोटे-मोटे काम किए। इसके बाद वह चुपचाप वापस दिल्ली लौट आया।

दिल्ली लौटने के बाद उसने अपने अतीत के सारे राज छिपा लिए और अलग-अलग कारखानों में पैकेजिंग मजदूर के रूप में काम करने लगा। हाल ही में क्राइम ब्रांच को सूचना मिली कि वह मंगोलपुरी फेज-2 की एक फैक्ट्री में फर्जी पहचान के सहारे छिपा हुआ है। पुलिस ने जाल बिछाकर उसकी पहचान पुख्ता की और उसे दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद मामले की सूचना शकरपुर थाने को दे दी गई है।

परिवार बसा लिया था आरोपी ने

मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला ललित फरारी के दौरान ही अपनी जिंदगी सामान्य दिखाने की कोशिश में लगा हुआ था। उसने मई 2017 में शादी भी कर ली थी और उसका पांच साल का एक बेटा भी है। फिलहाल, क्राइम ब्रांच उससे सख्ती से पूछताछ कर रही है ताकि इस तीन दशक पुराने मामले से जुड़ी अन्य कड़ियों को भी पूरी तरह से सुलझाया जा सके।

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