महाराणा प्रताप
महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर छत्तीसगढ़ के लोरमी में आयोजित भव्य समारोह में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के जीवन और आदर्शों को याद करते हुए उन्हें साहस, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति की अमर मिसाल बताया। इस दौरान उन्होंने महाराणा प्रताप की अष्टधातु प्रतिमा के निर्माण के लिए 20 लाख रुपए की सहायता देने की घोषणा कर उपस्थित लोगों का उत्साह बढ़ा दिया।
सर्वोदय राजपूत राठौर क्षत्रिय समाज द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के लोग, युवा, विद्यार्थी और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। समारोह में महाराणा प्रताप के संघर्ष, त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण को याद करते हुए उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दिया गया।
महाराणा प्रताप ने कभी नहीं झुकाया स्वाभिमान
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि भारत की पवित्र भूमि ने अनेक वीर योद्धाओं और महापुरुषों को जन्म दिया है, लेकिन महाराणा प्रताप का स्थान उनमें अत्यंत विशिष्ट है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने स्वाभिमान और राष्ट्रधर्म से कभी समझौता नहीं किया।
उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप ने मुगल सत्ता की अधीनता स्वीकार करने के बजाय संघर्ष का मार्ग चुना और हल्दीघाटी के युद्ध में अद्भुत साहस का परिचय दिया। उनका जीवन आज भी देशभक्ति और आत्मसम्मान की प्रेरणा देता है।
‘राष्ट्र प्रथम’ का मंत्र अपनाने का आह्वान
अरुण साव ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का “राष्ट्र प्रथम” का मंत्र प्रत्येक नागरिक के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत होना चाहिए।
उन्होंने कहा:
- देश और समाज की सेवा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
- युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
- समाज को शिक्षा और संस्कारों के माध्यम से मजबूत बनाना जरूरी है।
- देश की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाना सभी का दायित्व है।
उन्होंने युवाओं से महाराणा प्रताप के जीवन से प्रेरणा लेकर चुनौतियों का सामना करने और समाजहित में कार्य करने का आह्वान किया।
20 लाख रुपए की बड़ी घोषणा
कार्यक्रम का सबसे चर्चित क्षण तब आया जब उपमुख्यमंत्री ने महाराणा प्रताप की अष्टधातु प्रतिमा के निर्माण के लिए 20 लाख रुपए देने की घोषणा की।
इस घोषणा का समाज के लोगों ने जोरदार स्वागत किया। उपस्थित लोगों ने इसे महाराणा प्रताप के प्रति सम्मान और उनकी विरासत को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
समाज के प्रतिभावानों का हुआ सम्मान
समारोह के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित किया गया।
सम्मानित वर्गों में शामिल रहे:
- शिक्षक
- डॉक्टर
- खेल प्रशिक्षक
- खिलाड़ी
- पूर्व सैनिक
- समाजसेवी
- गौसेवक
- बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थी
इस सम्मान समारोह का उद्देश्य समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को प्रोत्साहित करना था।
रक्तदान शिविर बना आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम के साथ आयोजित रक्तदान शिविर ने भी विशेष ध्यान आकर्षित किया। शिविर में 55 लोगों ने स्वेच्छा से रक्तदान कर मानव सेवा का संदेश दिया।
उपमुख्यमंत्री ने सभी रक्तदाताओं को सम्मानित करते हुए कहा कि रक्तदान महादान है और यह किसी जरूरतमंद के जीवन को बचाने का सबसे बड़ा माध्यम है।
बड़ी संख्या में शामिल हुए समाज के लोग
कार्यक्रम में अखिल भारतीय घर वापसी अभियान के प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, राजपूत समाज के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और विभिन्न सामाजिक संगठनों के सदस्य मौजूद रहे।
महाराणा प्रताप जयंती समारोह केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह राष्ट्रभक्ति, स्वाभिमान और समाज सेवा के मूल्यों को मजबूत करने का मंच भी बना। समारोह से यह संदेश गया कि महाराणा प्रताप के आदर्श आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने सदियों पहले थे, और युवा पीढ़ी उनके जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।