प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान
महासमुंद जिले के तुमगांव स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की समय पर पहचान तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाना था।
कार्यक्रम के दौरान गर्भवती महिलाओं, उनके परिजनों और पतियों की सहभागिता के साथ विशेष गोसइया सम्मेलन का आयोजन भी किया गया। सम्मेलन में सुरक्षित मातृत्व, नियमित स्वास्थ्य जांच और गर्भावस्था के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर विस्तार से जानकारी दी गई।
मातृ मृत्यु दर कम करने पर जोर
स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताओं की पहचान कर मातृ मृत्यु दर में कमी लाना है। विभाग ने गर्भवती महिलाओं में जोखिम की पहचान के लिए 25 विशेष मानदंड निर्धारित किए हैं।
इन मानदंडों के आधार पर:
- उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान की जाती है।
- नियमित स्वास्थ्य निगरानी की जाती है।
- आवश्यक उपचार और परामर्श उपलब्ध कराया जाता है।
- समय पर रेफरल और विशेष चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित की जाती हैं।
हर माह चलाया जाता है विशेष अभियान
स्वास्थ्य विभाग द्वारा उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की देखभाल के लिए प्रत्येक माह की 9 और 24 तारीख को विशेष जांच एवं निगरानी अभियान संचालित किया जाता है।
इस अभियान के माध्यम से:
- गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताओं का समय पर पता लगाया जाता है।
- सुरक्षित प्रसव की तैयारी सुनिश्चित की जाती है।
- मां और शिशु दोनों के स्वास्थ्य की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
106 गर्भवती महिलाओं की हुई जांच
शिविर के दौरान कुल 106 गर्भवती महिलाओं की विस्तृत स्वास्थ्य जांच की गई। जांच के बाद आवश्यक उपचार, दवाइयां और स्वास्थ्य संबंधी परामर्श भी प्रदान किया गया।
विशेष रूप से:
- रक्तचाप और सामान्य स्वास्थ्य जांच
- गर्भावस्था संबंधी जोखिमों का आकलन
- पोषण एवं स्वास्थ्य परामर्श
- आवश्यक चिकित्सकीय मार्गदर्शन
जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई गईं।
निःशुल्क सोनोग्राफी सुविधा बनी आकर्षण का केंद्र
शिविर में गर्भवती महिलाओं की निःशुल्क सोनोग्राफी जांच भी कराई गई। इससे गर्भस्थ शिशु के विकास और संभावित स्वास्थ्य जोखिमों की समय रहते पहचान संभव हो सकी।
सोनोग्राफी के माध्यम से:
- भ्रूण की स्थिति का आकलन
- गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं की पहचान
- सुरक्षित प्रसव की बेहतर योजना
सुनिश्चित की गई।
स्वास्थ्य विभाग की टीम रही सक्रिय
कार्यक्रम को सफल बनाने में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तुमगांव के चिकित्सा अधिकारियों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
शिविर में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे:
- डॉ. निखिल चंद्राकर
- डॉ. ज्योति साहू
- विकासखंड कार्यक्रम प्रबंधक सुरेंद्र चंद्राकर
- स्वास्थ्य विभाग की अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी
सभी ने गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित मातृत्व से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।
सुरक्षित मातृत्व के लिए जागरूकता जरूरी
स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारजनों से अपील की है कि वे नियमित स्वास्थ्य जांच अवश्य कराएं और सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही मातृत्व सेवाओं का लाभ लें।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच, संतुलित आहार, चिकित्सकीय परामर्श और संस्थागत प्रसव से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।