यमराज भी आ जाएं तो फाइल नहीं मिलती थी!’ CM योगी का बड़ा तंज, IAS-IPS सिस्टम पर सुनाया दिलचस्प किस्सा

Yogi Adityanath

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस विभाग में चयनित 930 कंप्यूटर ऑपरेटरों को नियुक्ति पत्र वितरित करते हुए पुलिस सुधार, कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक बदलावों को लेकर कई अहम बातें कहीं। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था का बचाव करते हुए पुराने प्रशासनिक ढांचे पर चुटीले अंदाज में निशाना साधा।

मुख्यमंत्री का एक बयान कार्यक्रम के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। उन्होंने हंसते हुए कहा कि एक समय ऐसा था जब पुलिस अधिकारियों की फाइलें प्रशासनिक स्तर पर इतनी अटक जाती थीं कि “यमराज भी आ जाएं तो फाइल नहीं मिलती थी।”

कमिश्नरेट सिस्टम को लेकर क्या बोले CM योगी?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था कोई नई व्यवस्था नहीं है। यह देश के कई बड़े शहरों में लंबे समय से लागू है, लेकिन उत्तर प्रदेश में इसे लागू करने का साहस पहले किसी सरकार ने नहीं दिखाया।

उन्होंने कहा कि:

  • कमिश्नरेट व्यवस्था 1972 से देश के कई हिस्सों में लागू है।
  • उत्तर प्रदेश में इसे लागू करने को लेकर लंबे समय तक हिचकिचाहट रही।
  • पुलिस सुधारों के लिए इस व्यवस्था की जरूरत थी।
  • वर्तमान में राज्य के सात जिलों में कमिश्नरेट सिस्टम लागू किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिसिंग को आधुनिक और प्रभावी बनाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है।

‘IPS को ऐसा दबाते थे कि फाइलें गायब हो जाती थीं’

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने पुराने प्रशासनिक ढांचे का जिक्र करते हुए कहा कि कई बार पुलिस अधिकारियों की फाइलें लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ पाती थीं।

उन्होंने कहा,

  • एक बार फाइल बंद हो जाए तो उसे निकालना मुश्किल हो जाता था।
  • कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव वर्षों तक लंबित रहते थे।
  • निर्णय लेने की प्रक्रिया बेहद धीमी थी।
  • पुलिस सुधारों को लेकर इच्छाशक्ति की कमी दिखाई देती थी।

मुख्यमंत्री ने इसी संदर्भ में मजाकिया अंदाज में “यमराज” वाली टिप्पणी की, जिस पर कार्यक्रम में मौजूद लोग भी मुस्कुरा उठे।

2017 से पहले की कानून-व्यवस्था पर भी बोले

योगी आदित्यनाथ ने दावा किया कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण थी।

उन्होंने कहा:

  • बार-बार दंगे और सांप्रदायिक तनाव की घटनाएं होती थीं।
  • कई शहरों में लंबे समय तक कर्फ्यू लगाना पड़ता था।
  • त्योहारों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बड़ी चुनौती होती थी।
  • पुलिस अधिकारियों तक पर हमले होते थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सुरक्षित नहीं थे, तब आम नागरिकों की सुरक्षा की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

पुलिस इंफ्रास्ट्रक्चर में क्या बदलाव हुए?

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने पुलिस बल के लिए आधारभूत सुविधाओं में व्यापक सुधार किया है।

मुख्य उपलब्धियां:

  • आधुनिक पुलिस बैरकों का निर्माण।
  • प्रशिक्षण केंद्रों का विस्तार।
  • नई तकनीक और संसाधनों की उपलब्धता।
  • पुलिस आवास और कार्यस्थलों का आधुनिकीकरण।

उन्होंने कहा कि आज कई जिलों में सबसे ऊंची सरकारी इमारतें पुलिस विभाग की हैं, जो पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बदलाव का प्रतीक हैं।

भर्ती और ट्रेनिंग में रिकॉर्ड सुधार

मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार बनने के बाद पुलिस विभाग में खाली पदों की समीक्षा की गई और बड़े पैमाने पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई।

मुख्य बिंदु:

  • लाखों रिक्त पदों की पहचान।
  • कानूनी अड़चनों को दूर कर भर्ती प्रक्रिया शुरू।
  • प्रशिक्षण क्षमता 17 हजार से बढ़ाकर 60 हजार तक की गई।
  • भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया।

उन्होंने कहा कि अब भर्ती में किसी प्रकार की सिफारिश या भेदभाव की गुंजाइश नहीं है।

साइबर सुरक्षा और फोरेंसिक सुविधाओं पर जोर

योगी आदित्यनाथ ने बताया कि राज्य में फोरेंसिक और साइबर अपराध जांच क्षमता को भी मजबूत किया गया है।

सरकार के अनुसार:

  • फोरेंसिक लैब की संख्या में कई गुना वृद्धि हुई।
  • प्रत्येक जिले में साइबर थाना या साइबर डेस्क की व्यवस्था की गई।
  • मोबाइल फोरेंसिक यूनिट्स को बढ़ावा दिया गया।
  • तकनीक आधारित जांच प्रणाली विकसित की गई।

रोजगार और निवेश पर भी रखा पक्ष

मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून-व्यवस्था में सुधार का सीधा असर निवेश और रोजगार पर पड़ा है।

उन्होंने दावा किया कि:

  • पिछले नौ वर्षों में लाखों युवाओं को सरकारी नौकरियां मिली हैं।
  • राज्य में निवेश का माहौल बेहतर हुआ है।
  • औद्योगिक इकाइयों और MSME सेक्टर का विस्तार हुआ है।
  • युवाओं को अपने ही राज्य में रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।

क्यों चर्चा में है यह बयान?

मुख्यमंत्री का “यमराज भी आ जाएं तो फाइल नहीं मिलती थी” वाला बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टिप्पणी केवल हास्य नहीं थी, बल्कि इसके जरिए उन्होंने पुराने प्रशासनिक ढांचे और अपनी सरकार द्वारा किए गए पुलिस सुधारों की तुलना प्रस्तुत करने की कोशिश की।

उत्तर प्रदेश में पुलिस आधुनिकीकरण और प्रशासनिक सुधारों को लेकर चल रही बहस के बीच मुख्यमंत्री का यह बयान आने वाले दिनों में भी चर्चा में बना रह सकता है।

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