बढ़ती महंगाई और घरेलू खर्चों के बीच सरकार की तरफ से मिलने वाली LPG सिलेंडर सब्सिडी करोड़ों परिवारों को राहत देने का बड़ा जरिया बनी हुई है. खासतौर पर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए LPG सब्सिडी रसोई का बजट संभालने में अहम भूमिका निभाती है. पहले गैस सिलेंडर कम कीमत पर सीधे मिलते थे, लेकिन बाद में सरकार ने Direct Benefit Transfer (DBT) सिस्टम लागू किया. इसके तहत उपभोक्ता बाजार कीमत पर सिलेंडर खरीदते हैं और सब्सिडी की रकम सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाती है.
लेकिन, अब सरकार एक कैटेगरी के लिए LPG सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी को बंद करने जा रही है. इसके लिए ग्राहकों की पहचान करके उन्हें SMS भेजे जा रहे हैं.सरकार ने LPG सब्सिडी पाने वाले उपभोक्ताओं की जांच तेज कर दी है. तेल कंपनियों (OMCs) अब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के रिकॉर्ड से LPG उपभोक्ताओं की कमाई का मिलान कर रही हैं. इसका मकसद उन लोगों की पहचान करना है जो इनकम लिमिटसे ऊपर होने के बावजूद सब्सिडी का फायदा उठा रहे हैं.
क्या है LPG सब्सिडी?
LPG सब्सिडी केंद्र सरकार की एक योजना है, जिसके तहत घरेलू गैस सिलेंडर खरीदने वाले पात्र उपभोक्ताओं को आर्थिक सहायता दी जाती है. उपभोक्ता पहले बाजार मूल्य पर सिलेंडर खरीदते हैं और बाद में सब्सिडी की राशि उनके बैंक खाते में भेज दी जाती है.
LPG गैस कनेक्शन पर कितनी मिलती है सब्सिडी
सरकार की तरफ से रसोई गैस सिलेंडर (LPG कनेक्शन) पर सब्सिडी सीधे कन्ज्यूमर के आधार से जुड़े बैंक अकाउंट में भेजी जाती है. जनरल LPG कनेक्शन वालों को 79 रुपये प्रति सिलेंडर सब्सिडी मिलती है. वहीं, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत सब्सिडी की रकम करीब 300 रुपये तक होती है. हालांकि, एक साल में मैक्मिमम 12 सिलेंडर पर ही सब्सिडी लिया जा सकता है.
किसकी कट सकती है सब्सिडी?
सरकार के नियमों के मुताबिक, अगर LPG उपभोक्ता या पति/पत्नी की एनुअल टैक्सेबल इनकम 10 लाख रुपये से ज्यादा है, तो वह LPG सब्सिडी का पात्र नहीं है. यह नियम 2015 से लागू है, लेकिन अब इसकी सख्ती से जांच की जा रही है.
ITR डेटा से होगी जांच
तेल कंपनियां अब LPG उपभोक्ताओं का डेटा इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के रिकॉर्ड से मैच कर रही हैं. इस प्रक्रिया को आम बोलचाल में डेटा माइनिंग कहा जा रहा है. इससे यह पता लगाया जा रहा है कि कहीं कोई हाई इनकम वाला व्यक्ति सब्सिडी तो नहीं ले रहा.
लोगों को भेजे जा रहे हैं नोटिस
कई उपभोक्ताओं को SMS और WhatsApp मैसेज भेजे गए हैं. इसमें कहा गया है कि अगर उनकी इनकम 10 लाख रुपये से ज्यादा है, तो LPG सब्सिडी बंद की जा सकती है. अगर उपभोक्ता इस जानकारी से असहमत है, तो उसे निर्धारित समय के भीतर जवाब देना होगा.
जवाब नहीं दिया तो क्या होगा?
तेल कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि अगर निर्धारित अवधि के भीतर उपभोक्ता कोई जवाब नहीं देता, तो उसकी LPG सब्सिडी बंद की जा सकती है. इसलिए ऐसे संदेशों को नजरअंदाज करना नुकसानदायक हो सकता है.