पिछले कुछ हफ्ते से सोशल मीडिया पर एक खबर काफी तेजी से फैल रही है। दरअसल, इस खबर में दावा किया जा रहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक जल्द ही कागजी नोटों को बंद कर उसके जगह पर प्लास्टिक के नोट लॉन्च करने जा रही है। हालांकि, इस मामले में सरकार या आरबीआई की तरफ से अधिकारिक तौर पर कुछ भी नहीं कहा गया। लेकिन, सोशल मीडिया पर मौजूदा नोटों के बैन होने की तारीखें भी सामने आ गई हैं, जिससे लोगों में काफी कंफ्यूजन की स्थिति बनी हुई है।
सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट में किए गए दावे में कहा जा राह है कि भारतीय रिजर्व बैंक 30 जून से कागज के नोटों को पूरी तरह से बंद करने जा रहा है। इसी तारीख पर कागजी नोटों को प्लास्टिक के नोटों को रिप्लेस किया जाएगा। इस तरह के तमाम दावे के बाद लोगों के बीच भी काफी अफरा-तफरी मच गई। कई यूजर्स 2016 में हुए नोटबंदी को याद करने लगे। हालांकि, इस पोस्ट के वायरल होने के बाद अब सरकार ने इसका संज्ञान लिया है।
प्लास्टिक के नोटों पर सरकार का पक्ष
सरकार की अधिकृत एजेंसी PIB ने अपने ऑफिशियल एक्स अकाउंट से इस वीडियो को शेयर किया है। वहीं, पीआईबी ने इस वीडियो को पूरी तरह से फर्जी यानी की फेक बताया है। भारतीय रिजर्व बैंक के मुताबिक, 30 जून 2026 तक कागजी नोटों को बंद करने या इनके जगह प्लास्टिक के नए नोटों को लाने को कोई प्लानिंग नहीं है।
PIB का सोशल मीडिया यूजर्स से अपील
सोशल मीडिया ओर देश के लोगों से अपील करते हुए पीआईबी ने कहा कि इस तरह की किसी भी भ्रामक जानकारी पर भरोसा नहीं करना चाहिए। सरकारी एजेंसी ने लिखा कि सही जानकारी के लिए हमेशा आरबीआई की आफिशियल वेबसाइट को चेक करें। जानकारी साझा करने से हपले हमेशा उसके ऑफिशियल सोर्स से उसकी वेरिफिकेशन करें। भारत सरका से जुड़ी संदिग्ध जानकारी के लिए रिपोर्ट पीआईबी फैक्ट चेक पर अवश्य जांचें।
वित्त वर्ष 2024-25 में कितने नोट नष्ट हुए?
आरबीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2024-25 में लगभग 23.8 अरब मूल्य के भारतीय नोट को नष्ट किया गया, जो पिछले वर्ष 21.24 अरब की तुलना में 12.3 प्रतिशत अधिक है। इनमें सबसे अधिक संख्या 500 रुपये और 100 रुपये के नोटों की रही थी। इतनी बड़ी मात्रा में पुराने नोटों को नष्ट करना और फिर नए नोट छापना सरकारी खर्च पर भारी बोझ डालता है। वित्त वर्ष 2025-26 में नोट छापने की लागत 6,372.8 करोड़ रुपये थी, जो पिछले वर्ष 5,101.4 करोड़ की तुलना में काफी अधिक है। प्लास्टिक नोटों की शुरुआत से इस खर्च में काफी कमी आएगी।