भारतीय वायदा बाजार में बुधवार को सोने और चांदी की कीमतों में एक बहुत ही जोरदार और भारी गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने और फेडरल रिजर्व की सख्त नीतियों के कारण बाजार में यह बड़ी हलचल मची है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों में तेज गिरावट आने से भी निवेशकों ने नुकसान की भरपाई के लिए सोने की भारी बिक्री की है। इस भारी बिकवाली के कारण ही सोने की कीमतों में यह रिकॉर्ड और बड़ी गिरावट मुख्य रूप से देखने को मिल रही है।
बाजार के प्रमुख जानकारों का कहना है कि फेडरल रिजर्व के नए और सख्त अनुमान बाजार की उम्मीदों से काफी ज्यादा कड़े और सख्त दिखाई दे रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती सहमति से कच्चे तेल की कीमतों में भी कुछ गिरावट आई है। लेकिन मजबूत अमेरिकी डॉलर के सामने यह राहत बहुत ही ज्यादा फीकी और कमजोर पड़ गई है। सोने की इस लगातार और भारी गिरावट को देखते हुए बाजार विशेषज्ञों ने सभी निवेशकों को बहुत ज्यादा सतर्क और सावधान रहने की अहम सलाह दी है।
एमसीएक्स (MCX) पर अगस्त महीने के गोल्ड फ्यूचर्स में आज 1.21 प्रतिशत की बहुत भारी कमी प्रमुखता से दर्ज की गई है। इस बड़ी गिरावट के बाद अब सोने का भाव 1,44,759 रुपये प्रति 10 ग्राम के एक बेहद ही निचले स्तर पर आ गया है। वैश्विक स्तर पर हो रही लगातार गिरावट के कारण अगस्त गोल्ड फ्यूचर्स के और नीचे गिरने की भी बड़ी संभावना है। अगर कीमतें और टूटती हैं तो सोना 1,40,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के बहुत ही निचले और अहम स्तर तक जा सकता है।
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी आज बहुत भारी और स्पष्ट गिरावट साफ तौर पर देखने को मिल रही है। एमसीएक्स (MCX) पर जुलाई महीने के सिल्वर फ्यूचर्स में भी आज 0.71 प्रतिशत की एक बड़ी गिरावट पूरी तरह दर्ज की गई है। इस भारी गिरावट के बाद चांदी की कीमत लुढ़ककर 2,24,227 रुपये प्रति 1 किलोग्राम के एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्तर पर आ गई है। विश्लेषकों के अनुसार चांदी को वर्तमान में 2,21,000 रुपये और 2,16,600 रुपये के अहम स्तर पर एक बड़ा सपोर्ट मिल रहा है।
सोने की इस भारी गिरावट का सबसे मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर का पिछले एक साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचना माना जा रहा है। डॉलर इंडेक्स इस समय 101.52 के अहम स्तर पर पहुंच गया है जो कीमती धातुओं के लिए बहुत भारी दबाव का बड़ा कारण है। अमेरिकी डॉलर में कारोबार होने के कारण अन्य मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए अब सोना खरीदना काफी ज्यादा महंगा हो गया है। बाजार की नजरें अब अमेरिकी पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर के आने वाले अहम आंकड़ों पर पूरी तरह से मजबूती के साथ टिकी हुई हैं।