IFS निहारिका सिंह और उनके पति की मुश्किलें बढ़ीं, PMLA कोर्ट ने ED की शिकायत का लिया संज्ञान

भारतीय विदेश सेवा की अधिकारी निहारिका सिंह और उनके पति अजीत कुमार गुप्‍ता (अनी बुलियन ट्रेडर्स कम्पनी के संचालक अजीत गुप्ता) की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनके खिलाफ अब विशेष न्‍यायालय (पीएमएलए) में कानूनी कार्रवाई में तेजी आएगी। कोर्ट ने इसी साल दो सितम्‍बर निहारिका सिंह, उनके पति अजीत कुमार, मैसर्स अनी कमोडिटी ब्रोकर्स प्रा. लिमिटेड और मैसर्स अनी सिक्योरिटीज प्रा. लिमिटेड के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत पीएमएलए कोर्ट में अभियोजन शिकायत (पीसी) दर्ज कराई थी। ईडी लखनऊ ने बुधवार को सोशल मीडिया प्‍लेटफार्म ‘एक्‍स’ पर एक पोस्‍ट में बताया कि न्‍यायालय ने इस शिकायत का संज्ञान लिया है।

निहारिका सिंह और उनके पति के खिलाफ अलग-अलग थानों में विभिन्‍न धाराओं में दर्ज 33 एफआईआर में ईडी यह जांच कर रही है। ये एफआईआर 21 फरवरी 2020 से 26 अक्‍टूबर 2020 के बीच निवेशकों और सार्वजनिक लोगों द्वारा धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपों में दर्ज कराई गई हैं। बाद में आरोपियों के खिलाफ 12 एफआईआर में 25 आरोप आरोप पत्र दायर किए गए।

ईडी की जांच से पता चला कि शुरू में आरोपी अजीत कुमार गुप्ता ने अपने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर विभिन्न फर्जी योजनाएं चलाकर भोले-भाले निवेशकों से भारी धन इकट्ठा किया। उन्‍होंने दैनिक जमा योजना, मासिक आवर्ती जमा योजना, निश्चित योजना जैसी कई योजनाएं अपनी स्वामित्व वाली कंपनी मैसर्स अनी बुलियन ट्रेडर के माध्यम से प्रति वर्ष 40% तक की अत्यधिक दर के रिटर्न के वादे के साथ चलाई लेकिन जिसे वे वापस करने में विफल रहे। बाद में, उन्होंने अपने करीबी सहयोगियों के माध्यम से मेसर्स आई विजन क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के खाते का उपयोग करके निवेशकों से नई रिटर्न लिंक्ड निवेश योजनाओं के नाम पर पैसा इकट्ठा करना शुरू कर दिया। निवेश कभी वापस नहीं किया गया और निर्दोष लोगों से करीब 60 करोड़ रुपये तक की धोखाधड़ी की गई।

ईडी की जांच में आगे पता चला कि भोले-भाले निवेशकों को लुभाकर अजीत गुप्ता द्वारा अर्जित अपराध की आय (पीओसी) को अनी समूह की विभिन्न कंपनियों के माध्यम से आगे बढ़ाया गया और इसका उपयोग विभिन्न अचल संपत्तियों जैसे घर की कृषि भूमि आदि की खरीद के लिए किया गया। यह खरीद अजीत गुप्‍ता, उनकी आईएफएस पत्नी निहारिका सिंह और अन्य के नाम पर की गई। जांच के दौरान 9.10 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्ति का भी पता चला जिन्‍हें अटैच किया गया।

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