नैनो उर्वरकों का कमाल! किसान की धान उपज में 10% बढ़ोतरी, आधी हुई यूरिया की खपत

धान की खेती में बढ़ती लागत और घटती लाभप्रदता के बीच नैनो उर्वरक किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरे हैं। छत्तीसगढ़ के उत्तर बस्तर कांकेर जिले के एक प्रगतिशील किसान ने नैनो तकनीक आधारित उर्वरकों का उपयोग कर यह साबित कर दिया है कि कम लागत में भी बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। कृषि विभाग की सलाह पर किए गए इस प्रयोग से न केवल उर्वरक खर्च में कमी आई, बल्कि धान की पैदावार में भी लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

नैनो उर्वरकों से बदली खेती की तस्वीर

कांकेर विकासखंड के ग्राम कोटगांवनीचे के किसान श्री अघन सिंह दर्रो ने इस खरीफ सीजन में अपनी धान फसल में पारंपरिक उर्वरकों के साथ नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का संतुलित उपयोग किया। इसका परिणाम उनकी उम्मीदों से कहीं बेहतर रहा।

किसान के अनुसार:

  • फसल की वृद्धि अधिक तेज हुई।
  • पौधों में अधिक संख्या में कल्ले निकले।
  • तने मजबूत बने।
  • फसल लंबे समय तक हरी-भरी और स्वस्थ रही।
  • उत्पादन में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

रोपा उपचार से मिली मजबूत शुरुआत

धान की रोपाई से पहले श्री दर्रो ने पौधों की जड़ों का नैनो डीएपी घोल से उपचार किया। इस तकनीक ने पौधों को शुरुआती अवस्था से ही बेहतर पोषण प्रदान किया।

इसके प्रमुख लाभ:

  • जड़ों का तेजी से विकास।
  • मिट्टी से पोषक तत्वों का बेहतर अवशोषण।
  • पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार।
  • फसल की मजबूत नींव तैयार हुई।

विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती अवस्था में जड़ों का अच्छा विकास पूरी फसल के प्रदर्शन को बेहतर बनाता है।

आधी हुई दानेदार यूरिया की जरूरत

कृषि विभाग की सलाह के अनुसार किसान ने सामान्य यूरिया की मात्रा में लगभग 50 प्रतिशत कमी की। शेष नाइट्रोजन की पूर्ति के लिए फसल की 40 से 45 दिन की अवस्था में नैनो यूरिया का पर्णीय छिड़काव किया गया।

इस तकनीक से:

  • पौधों को सीधे पत्तियों के माध्यम से पोषण मिला।
  • उर्वरक की बर्बादी कम हुई।
  • उत्पादन लागत घटी।
  • पर्यावरणीय प्रभाव भी कम हुआ।

खेती की लागत में आई कमी

आज के समय में उर्वरकों की बढ़ती कीमतें किसानों के लिए बड़ी चुनौती हैं। ऐसे में नैनो उर्वरकों का उपयोग आर्थिक रूप से भी लाभकारी साबित हो रहा है।

मुख्य फायदे:

  • कम मात्रा में अधिक प्रभाव।
  • उर्वरक लागत में बचत।
  • उत्पादन में वृद्धि।
  • मिट्टी की गुणवत्ता पर सकारात्मक प्रभाव।

यही कारण है कि देशभर में नैनो उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

किसानों के लिए प्रेरणा बना यह मॉडल

श्री अघन सिंह दर्रो का अनुभव क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन रहा है। उन्होंने बताया कि पहले वे पूरी तरह पारंपरिक उर्वरकों पर निर्भर थे, जिससे लागत अधिक आती थी। लेकिन नैनो तकनीक अपनाने के बाद खर्च कम हुआ और उपज बढ़ी।

उनका मानना है कि यदि किसान वैज्ञानिक सलाह के अनुसार नैनो उर्वरकों का संतुलित उपयोग करें तो खेती को अधिक लाभदायक बनाया जा सकता है।

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