‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान ने बदली कांकेर की तस्वीर, जल संरक्षण में प्रदेश में नंबर-1 बना जिला

Mor Gaon Mor Pani

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के उत्तर बस्तर कांकेर जिले ने पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन के क्षेत्र में एक नई मिसाल पेश की है। मनरेगा और ‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान के माध्यम से जिले में न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा मिला है, बल्कि ग्रामीणों की आजीविका और खेती-किसानी को भी नई मजबूती मिली है।

जिला प्रशासन के प्रयासों से कांकेर आज जल संरक्षण और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में प्रदेश के अग्रणी जिलों में शामिल हो गया है। खास बात यह है कि आजीविका डबरी निर्माण के मामले में कांकेर पूरे छत्तीसगढ़ में पहले स्थान पर पहुंच गया है।

जल संरक्षण बना ग्रामीण विकास की ताकत

ग्रामीण क्षेत्रों में घटते भूजल स्तर और सिंचाई की समस्याओं को देखते हुए ‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान को व्यापक स्तर पर लागू किया गया।

इस अभियान के तहत:

  • जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण
  • तालाबों का गहरीकरण
  • परकोलेशन टैंक निर्माण
  • चेक डैम निर्माण
  • रिचार्ज पिट और सोक पिट निर्माण
  • खेतों में जल संचयन व्यवस्था

जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं।

इन प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल स्तर सुधारने और वर्षा जल को संरक्षित करने में सफलता मिली है।

आजीविका डबरी निर्माण में प्रदेश में अव्वल

जिला पंचायत से प्राप्त जानकारी के अनुसार कांकेर जिले में कुल 2,597 आजीविका डबरी का निर्माण किया गया है, जो पूरे प्रदेश में सबसे अधिक है।

आजीविका डबरी से किसानों को कई फायदे मिल रहे हैं:

  • खेतों में सिंचाई की सुविधा
  • वर्षा जल का संरक्षण
  • पशुपालन को बढ़ावा
  • बागवानी विकास
  • अतिरिक्त आय के अवसर

विशेष रूप से महिला स्व-सहायता समूहों को इसका लाभ मिल रहा है।

महिलाओं की आय बढ़ाने में मिल रही मदद

जिले में महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्याओं की निजी भूमि पर आजीविका डबरी के आसपास फलदार पौधों का रोपण किया गया है।

मुख्य रूप से लगाए गए पौधे:

  • आम
  • अमरूद
  • जामुन
  • अन्य फलदार प्रजातियां

इन पौधों से भविष्य में महिलाओं को अतिरिक्त आय प्राप्त होने की संभावना है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।

वृक्षारोपण पर विशेष फोकस

पिछले वर्ष जिले में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाया गया था।

इसके अंतर्गत:

  • शासकीय परिसरों में पौधारोपण
  • तालाबों की मेड़ों पर पौधे
  • मुख्य सड़कों के किनारे हरियाली
  • फलदार एवं छायादार पौधों का रोपण

किया गया।

इस वर्ष प्रशासन ने केवल पौधे लगाने तक सीमित न रहकर उनके संरक्षण और जीवित रहने की दर बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया है।

11 हजार से ज्यादा जल संरक्षण संरचनाएं

कांकेर जिले में अब तक कुल 11,495 जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया जा चुका है।

इनमें शामिल हैं:

  • मिनी परकोलेशन टैंक
  • नए तालाब
  • तालाब गहरीकरण
  • ब्रशवुड संरचनाएं
  • लूज बोल्डर संरचनाएं
  • गैबियन स्ट्रक्चर
  • चेक डैम
  • अर्दन डेम
  • रिचार्ज पिट
  • सोक पिट

इन सभी कार्यों का सीधा लाभ किसानों और ग्रामीण परिवारों को मिल रहा है।

आत्मनिर्भर गांवों की ओर बढ़ता कांकेर

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी Haresh Mandavi ने कहा कि मनरेगा और ‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान केवल रोजगार उपलब्ध कराने की योजना नहीं हैं, बल्कि ये गांवों को आत्मनिर्भर और पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाने की मजबूत पहल हैं।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रशासन ने जिलेवासियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और जल संरक्षण के कार्यों में भागीदारी बढ़ाने की अपील की है।

कांकेर जिले की यह सफलता दिखाती है कि जब जनभागीदारी, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य एक साथ जुड़ते हैं, तो विकास और प्रकृति दोनों का संतुलन संभव हो जाता है।

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