धान के भरोसे नहीं, अब मिश्रित खेती से बढ़ेगी कमाई: कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने किसानों को दिया बड़ा मंत्र

मिश्रित खेती


किसानों को मिश्रित खेती अपनाने की सलाह, बढ़ेगी आय और घटेगी लागत

छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने किसानों से पारंपरिक खेती के साथ मिश्रित खेती अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि केवल धान पर निर्भर रहने के बजाय किसानों को दलहन, तिलहन और अन्य फसलों की खेती भी करनी चाहिए, जिससे कम लागत में अधिक मुनाफा कमाया जा सके।

कांकेर में आयोजित किसान संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु और पानी की उपलब्धता को देखते हुए खेती के तरीकों में बदलाव समय की जरूरत बन गया है।


धान के साथ दलहन-तिलहन की खेती पर जोर

कृषि मंत्री ने किसानों को कम पानी और कम लागत वाली फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि धान के साथ-साथ दलहन और तिलहन की खेती किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

मिश्रित खेती के फायदे:

  • पानी की बचत होती है।
  • खेती की लागत कम होती है।
  • मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहती है।
  • किसानों की आय के कई स्रोत तैयार होते हैं।
  • फसल नुकसान का जोखिम कम होता है।

खेत की मेड़ों पर मुनगा लगाने की सलाह

मंत्री ने किसानों को खेत की मेड़ों पर मुनगा और अरहर जैसे पौधे लगाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि इससे अतिरिक्त आय के साथ-साथ पोषण सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

उन्होंने बताया कि मुनगा की बाजार में अच्छी मांग है और इसकी खेती किसानों के लिए लाभदायक साबित हो सकती है।


खेती के साथ पशुपालन और मछलीपालन भी जरूरी

कृषि मंत्री ने किसानों से केवल खेती तक सीमित न रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसानों को अतिरिक्त आय के लिए अन्य गतिविधियों को भी अपनाना चाहिए।

अतिरिक्त आय के प्रमुख स्रोत:

  • मछली पालन
  • मुर्गी पालन
  • पशुपालन
  • डेयरी व्यवसाय

उन्होंने कहा कि घर-घर में गाय पालन से दूध, जैविक खाद और अतिरिक्त आमदनी तीनों का लाभ मिलेगा।


जैविक खेती को बताया भविष्य की जरूरत

मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति लगातार घट रही है। इसलिए किसानों को धीरे-धीरे जैविक खेती की ओर बढ़ना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जैविक खेती न केवल पर्यावरण के लिए बेहतर है, बल्कि इससे उत्पादों की बाजार में बेहतर कीमत भी मिलती है।


धान छोड़ अन्य फसल लगाने पर मिलेगा 15 हजार रुपये प्रति एकड़

कृषि मंत्री ने किसानों को सरकार की नई प्रोत्साहन योजना की जानकारी भी दी।

उन्होंने बताया कि जो किसान इस वर्ष खरीफ सीजन में धान के स्थान पर मक्का, दलहन या तिलहन की खेती करेंगे, उन्हें सरकार की ओर से प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की आदान सहायता दी जाएगी।

यह योजना जल संरक्षण और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई है।


मिलेट प्रोसेसिंग से महिलाओं को मिल रही अतिरिक्त आय

कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री ने कृषि विज्ञान केंद्र में संचालित मिलेट प्रोसेसिंग इकाई का निरीक्षण भी किया। यहां स्वयं सहायता समूह की महिलाएं कोदो, कुटकी और रागी की प्रोसेसिंग का कार्य कर रही हैं।

महिलाओं ने बताया कि इस कार्य से समूह के प्रत्येक सदस्य को हर महीने लगभग 6 से 7 हजार रुपये की अतिरिक्त आय हो रही है।


कृषि विज्ञान केंद्र में किया पौधारोपण

कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री रामविचार नेताम और विधायक आशाराम नेताम ने कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में नारियल का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।


खेती में बदलाव ही किसानों की समृद्धि का रास्ता

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में मिश्रित खेती, जैविक खेती और कृषि आधारित अन्य व्यवसाय ही किसानों की आय बढ़ाने का सबसे प्रभावी माध्यम बनेंगे। ऐसे में फसल विविधीकरण और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाना किसानों के लिए लाभदायक साबित हो सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *