शासकीय आयोजनों में सिर्फ “देवभोग” उत्पाद अनिवार्य: कलेक्टर के निर्देश से स्थानीय किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ!


देवभोग उत्पाद


📰 Article (400+ शब्द, सरल और यूनिक भाषा)

छत्तीसगढ़ के जगदलपुर जिले में स्थानीय पशुपालकों और किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। कलेक्टर आकाश छिकारा ने निर्देश जारी किए हैं कि अब जिले के सभी शासकीय आयोजनों, बैठकों, सम्मेलनों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में केवल देवभोग ब्रांड के दूध और दुग्ध उत्पादों का ही उपयोग किया जाएगा।

इस फैसले को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सहकारी दुग्ध व्यवस्था को बढ़ावा देने वाला बड़ा कदम माना जा रहा है।


📌 क्या है नया निर्देश?

कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के अनुसार—

  • सभी सरकारी कार्यक्रमों में केवल देवभोग उत्पादों का उपयोग होगा
  • दूध, दही, छाछ और अन्य दुग्ध उत्पाद इसी ब्रांड से लिए जाएंगे
  • अन्य किसी ब्रांड का उपयोग शासकीय आयोजनों में नहीं किया जाएगा

📌 किसानों और पशुपालकों को फायदा

इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य राज्य के स्थानीय पशुपालकों और दुग्ध सहकारी समितियों को मजबूत करना है। इससे—

  • दूध उत्पादकों को सीधा बाजार मिलेगा
  • ग्रामीण आय में वृद्धि होगी
  • सहकारी समितियों की भूमिका मजबूत होगी
  • आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा

📌 नियमों का आधार क्या है?

निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि यह निर्णय छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम 2002 (संशोधित 2020) के तहत लिया गया है। इसके अनुसार—

  • यदि कोई सामग्री राज्य की सहकारी संस्था द्वारा बनाई जा रही है
  • तो उसे सीधे खरीदा जा सकता है
  • इसके लिए अलग से टेंडर प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होती

इससे खरीद प्रक्रिया सरल और तेज हो जाती है।


📌 किन पर लागू होगा यह आदेश?

यह नियम तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है और यह सभी पर लागू होगा—

  • सरकारी विभाग
  • सार्वजनिक उपक्रम
  • निगम और मंडल
  • स्थानीय निकाय

📌 अधिकारियों को सख्त निर्देश

कलेक्टर ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि—

  • शासकीय कार्यक्रमों के बिल और वाउचर की जांच की जाए
  • केवल देवभोग उत्पादों की खरीद सुनिश्चित की जाए
  • नियमों का पालन अनिवार्य रूप से किया जाए

📌 क्यों है यह फैसला महत्वपूर्ण?

यह निर्णय केवल एक खरीद नीति नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है क्योंकि—

  • स्थानीय ब्रांड को बढ़ावा मिलेगा
  • किसानों की आमदनी में सुधार होगा
  • सहकारी मॉडल मजबूत होगा
  • राज्य में आत्मनिर्भरता को गति मिलेगी

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