वकील न गवाह, गोरक्षपीठाधीश्वर की अदालत में यूं सुलझते हैं संतों के विवाद

वकील, न गवाह। इस अदालत में सिर्फ सच के आधार पर फैसले होते हैं। दंडाधिकारी के रूप में गोरक्षपीठाधीश्वर संतों के आपसी विवादों को सुनते और सुलझाते हैं। अदालत की खास बात यह है कि यह साल में सिर्फ एक दिन लगती है। वो दिन होता है विजयदशमी का। नाथ पंथ की ये परंपरा शुरू से चली आ रही है। इस बार भी गोरक्षपीठाधीश्वर और मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ इस परंपरा को निभाएंगे और संतों के तमाम आपसी विवादों का निपटारा करेंगे।

दरअसल, गोरक्षपीठाधीश्वर होने के साथ-साथ योगी आदित्‍यनाथ नाथ पंथ की सबसे बड़ी संस्‍था अखिल भारतवर्षीय अवधूत भेष बारह पंथ योगी महासभा के अध्‍यक्ष भी हैं। 2014 में गोरक्षपीठाधीश्वर के रूप में अभिषेक के बाद से ही वह नाथ पंथ के इन दोनों सर्वोच्‍च दायित्‍वों को संभाल रहे हैं। हर साल विजयदशमी पर गोरक्षपीठाधीश्वर दंडाधिकारी की भूमिका में होते हैं। बताते हैं कि रात में अदालत लगती है जिसमें संतों के विवाद सुलझाए जाते हैं। इस अदालत में विवाद सुलझाने से पहले साधु-संत, पात्र देवता के रूप में महायोगी गोरखनाथ का पूजन करते हैं। इसके बाद पात्र देवता के सामने विवाद रखे जाते हैं। साधु-संतों की सुनवाई होती है। खास बात यह है कि इसमें कोई भी झूठ नहीं बोल सकता। पात्र पूजा संत समाज के अनुशासन की पहचान होती है।

विजयदशमी के दिन गोरखनाथ मंदिर में सुबह से ही अनुष्‍ठानों का प्रारंभ हो जाता है। इस दिन गोरक्षपीठाधीश्वर विशेष परिधान में होते हैं। नाथ पंथ की परंपरा का अनुसरण करते हुए पूरे विधि विधान से श्रीनाथ जी की पूजा-आराधना करते हैं। इसके बाद मंदिर में प्रतिष्ठित सभी देव विग्रहों का विशिष्ट पूजन किया जाता है। विशिष्‍ट पूजन की शुरुआत गोरखनाथ मंदिर में शक्तिपीठ से होती है जहां नवरात्र प्रतिपदा से अनुष्‍ठान चल रहे होते हैं। गोरक्षपीठाधीश्वर, विजयादशमी के दिन गोरखनाथ मंदिर में होने वाले पारंपरिक तिलकोत्सव कार्यक्रम में श्रद्धालुओं को आशीर्वाद भी देते हैं।

विजयदशमी के दिन गोरक्षपीठाधीश्वर की अगुवाई में अनूठी शोभायात्रा भी निकाली जाती है। इसमें हर वर्ग के लोग शामिल होते हैं। अल्‍पसंख्‍यक समाज के लोगों द्वारा भी शोभायात्रा का स्‍वागत किया जाता है। इस साल भी गोरखनाथ मंदिर से धूमधाम से शोभायात्रा निकाली जाएगी। गुरु गोरक्षनाथ का आशीर्वाद लेकर गोरक्षपीठाधीश्वर अपने वाहन पर सवार होंगे। उनकी शोभायात्रा तुरही, नगाड़े और बैंड-बाजे की धुन के बीच मानसरोवर मंदिर पहुंचेगी। मानसरोवर मंदिर पर गोरक्षपीठाधीश्‍वर देवाधिदेव महादेव की पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद शोभायात्रा मानसरोवर रामलीला मैदान पहुंचेगी। गोरक्षपीठाधीश्वर, यहां चल रही रामलीला में प्रभु श्रीराम का राजतिलक करेंगे। प्रभु श्रीराम, माता सीता, लक्ष्‍मण और हनुमानजी की आरती भी उतारी जाएगी। इसके बाद गोरक्षपीठाधीश्वर का संबोधन होगा।

हर साल की तरह इस बार भी विजयदशमी की शाम गोरखनाथ मंदिर में परंपरागत भोज का आयोजन होना है। इस भोज में सर्वसमाज के लोग शामिल होते हैं। अमीर-गरीब, जाति-मजहब, हर तरह के भेद मिट जाते हैं।

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