रायपुर के नकटी गांव में बुलडोजर एक्शन पर बवाल: 48 घंटे के नोटिस के बाद भड़के ग्रामीण, PM आवास तोड़ने के आरोप से बढ़ा विवाद

नकटी गांव बुलडोजर विवाद

राजधानी रायपुर के नकटी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर एक बार फिर माहौल गर्म हो गया है। प्रशासन द्वारा केवल 48 घंटे में घर खाली करने का नोटिस दिए जाने के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिली। नोटिस की अवधि पूरी होते ही शुक्रवार को प्रशासनिक अमला भारी पुलिस बल के साथ गांव पहुंचा, जिसके बाद विरोध और तनाव की स्थिति पैदा हो गई।

प्रशासन की टीम एक दर्जन से अधिक मकानों को हटाने के लिए पहुंची थी, लेकिन बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने गांव के बाहर ही अधिकारियों और पुलिस को रोक दिया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी, जिससे इलाके में तनाव फैल गया।

गांव के बाहर ही शुरू हुआ विरोध

जैसे ही प्रशासनिक टीम गांव पहुंची, बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और युवा सड़क पर उतर आए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उन्हें घर खाली करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया और बिना वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें बेघर किया जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से वे इसी जमीन पर रह रहे हैं और अचानक 48 घंटे के नोटिस के आधार पर मकान खाली कराने की कार्रवाई अन्यायपूर्ण है।

प्रधानमंत्री आवास योजना के मकानों पर उठे सवाल

विवाद उस समय और गहरा गया जब ग्रामीणों ने दावा किया कि जिस जमीन को प्रशासन चारागाह भूमि बताकर खाली कराने की बात कर रहा है, उसी जमीन पर सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकानों का निर्माण कराया था।

ग्रामीणों का सवाल है कि यदि जमीन सरकारी रिकॉर्ड में चारागाह थी, तो फिर उसी स्थान पर सरकारी योजना के तहत आवास निर्माण की अनुमति कैसे दी गई। इस सवाल ने पूरे मामले को राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का विषय बना दिया है।

1300 से अधिक लोगों पर असर पड़ने की आशंका

ग्रामीणों के अनुसार इस कार्रवाई से गांव की लगभग 1300 से अधिक आबादी प्रभावित हो सकती है। कई परिवार पीढ़ियों से इस इलाके में निवास कर रहे हैं और उनकी आजीविका भी इसी क्षेत्र से जुड़ी हुई है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उनकी पुश्तैनी जमीन को खाली कराने के पीछे बड़े स्तर पर जमीन का उपयोग बदलने की योजना हो सकती है। हालांकि इस संबंध में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।

मुआवजा और पुनर्वास की मांग

ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि किसी भी बेदखली कार्रवाई से पहले प्रभावित परिवारों के लिए पुनर्वास की व्यवस्था और उचित मुआवजा सुनिश्चित किया जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकार वैकल्पिक जमीन या आवास उपलब्ध कराती है, तो वे बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन बिना किसी व्यवस्था के घर छोड़ना संभव नहीं है।

प्रशासन की नजर हालात पर

घटना के बाद क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में प्रशासन और ग्रामीणों के बीच बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है।

नकटी गांव का यह मामला अब केवल अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पुनर्वास, मुआवजा और आवासीय अधिकारों से जुड़ा बड़ा सामाजिक मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में इस विवाद का समाधान किस दिशा में जाता है, इस पर पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है।

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