निलंबित कर्मचारी
खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित जिला आबकारी कार्यालय से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। कार्यालयीन समय में कथित रूप से शराब सेवन करते दिखाई देने वाले मुख्य लिपिक सहित दो कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद सरकारी कार्यालयों में अनुशासन और कार्यसंस्कृति को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
जानकारी के अनुसार, सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में जिला आबकारी कार्यालय के सहायक ग्रेड-3 सुजीत पुरी गोस्वामी और मुख्य लिपिक वीरेंद्र सिंह यादव कथित रूप से शराब का सेवन करते नजर आए। वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया और प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ने लगा।
वीडियो वायरल होते ही मचा हड़कंप
जैसे ही वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हुआ, प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई। विभिन्न समाचार माध्यमों और स्थानीय स्तर पर इस घटना को लेकर सवाल उठने लगे। आरोप था कि कार्यालयीन समय के दौरान सरकारी कर्मचारी अपने कक्ष में शराब का सेवन कर रहे थे।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लिया और प्रारंभिक जांच शुरू कराई।
जांच में सामने आई गंभीर अनुशासनहीनता
प्रारंभिक जांच के दौरान उपलब्ध तथ्यों और वायरल वीडियो के आधार पर यह मामला प्रथम दृष्टया गंभीर पाया गया। प्रशासन ने माना कि यदि कार्यालयीन समय में किसी कर्मचारी द्वारा शासकीय कार्यालय में मद्यपान किया गया है, तो यह शासकीय सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन है।
जांच में मुख्य लिपिक वीरेंद्र सिंह यादव के कार्यालय कक्ष में कथित रूप से शराब सेवन किए जाने की जानकारी सामने आने पर इसे गंभीर अनुशासनहीनता माना गया।
मुख्य लिपिक तत्काल प्रभाव से निलंबित
अपर कलेक्टर सुरेंद्र कुमार ठाकुर द्वारा जारी आदेश में छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के तहत मुख्य लिपिक वीरेंद्र सिंह यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
निलंबन आदेश के प्रमुख बिंदु:
- तत्काल प्रभाव से सेवा से निलंबन।
- निलंबन अवधि में मुख्यालय जिला आबकारी कार्यालय निर्धारित।
- बिना पूर्व अनुमति मुख्यालय छोड़ने पर प्रतिबंध।
- नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
- विभागीय जांच जारी रहेगी।
दूसरे कर्मचारी पर भी गिरी गाज
वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी सुजीत पुरी गोस्वामी के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है और दोषियों के खिलाफ विभागीय नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी दफ्तरों में अनुशासन पर उठे सवाल
इस घटना ने सरकारी कार्यालयों की कार्यप्रणाली और अनुशासन व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर आबकारी विभाग कानून के पालन और शराब नियंत्रण से जुड़े मामलों की निगरानी करता है। ऐसे में उसी विभाग के कर्मचारियों का कथित रूप से कार्यालय में शराब सेवन करते दिखाई देना चर्चा का विषय बन गया है।
प्रशासन का स्पष्ट संदेश
जिला प्रशासन ने इस कार्रवाई के जरिए स्पष्ट संकेत दिया है कि सरकारी सेवा में अनुशासनहीनता, कर्तव्य में लापरवाही और सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
फिलहाल मामले की विस्तृत विभागीय जांच जारी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ और भी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन ने कहा है कि शासकीय कार्यालयों की गरिमा बनाए रखना सभी कर्मचारियों की जिम्मेदारी है और नियमों के उल्लंघन पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।