छत्तीसगढ़ के जांजगीर जिले में एक बच्चे की मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। शुरुआती आशंका थी कि तरबूज खाने के बाद बच्चे की तबीयत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई, लेकिन अब खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट ने इस मामले को नया मोड़ दे दिया है। जांच में संबंधित तरबूज के नमूने में किसी भी प्रकार की मिलावट या हानिकारक तत्व नहीं पाए गए हैं।
इस खुलासे के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि बच्चे की मौत का कारण केवल तरबूज नहीं था, बल्कि फूड पॉइजनिंग की वजह से उसकी तबीयत बिगड़ी थी। हालांकि यह अभी भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि फूड पॉइजनिंग किस खाद्य पदार्थ से हुई।
कैसे सामने आया मामला?
जांजगीर में बच्चे की मौत के साथ ही तीन अन्य लोग भी बीमार पड़ गए थे। परिवार और स्थानीय लोगों ने बताया था कि सभी ने रात में बिरयानी और तरबूज का सेवन किया था। इसके बाद संदेह जताया गया कि कहीं तरबूज में केमिकल या किसी प्रकार की खतरनाक मिलावट तो नहीं थी।
घटना की गंभीरता को देखते हुए खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित तरबूज के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे थे।
जांच रिपोर्ट में क्या मिला?
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार:
- तरबूज के नमूनों में किसी प्रकार की मिलावट नहीं मिली।
- जांच में कोई जहरीला रसायन या खतरनाक तत्व नहीं पाया गया।
- बच्चे की मौत फूड पॉइजनिंग से हुई थी।
- फूड पॉइजनिंग का कारण घटना से 8 से 10 घंटे पहले खाया गया कोई अन्य खाद्य पदार्थ भी हो सकता है।
- केवल तरबूज को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा।
इस रिपोर्ट ने सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर फैल रही कई अफवाहों पर भी विराम लगा दिया है।
रायपुर की लैब रिपोर्ट का इंतजार
घटना के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने रायपुर के लालपुर फल बाजार में भी जांच अभियान चलाया था।
जांच के दौरान लिए गए नमूने:
- तरबूज के 2 सैंपल
- अनार का 1 सैंपल
- आम का 1 सैंपल
- मौसंबी का 1 सैंपल
इन सभी नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। अधिकारियों के मुताबिक अभी इनकी रिपोर्ट आना बाकी है। रिपोर्ट मिलने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
प्रदेशभर में बढ़ाई गई निगरानी
इस घटना के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने प्रदेशभर में फलों की गुणवत्ता जांचने के लिए विशेष अभियान भी चलाया। मई के अंतिम सप्ताह में थोक और खुदरा फल विक्रेताओं की दुकानों पर निरीक्षण किया गया।
प्रशासन का कहना है कि लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए नियमित जांच जारी रहेगी।
अफवाहों से बचने की अपील
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी खाद्य पदार्थ को जांच रिपोर्ट आने से पहले दोषी ठहराना उचित नहीं है। फूड पॉइजनिंग कई कारणों से हो सकती है, जिसमें दूषित भोजन, गलत तरीके से रखा गया खाना या बैक्टीरिया युक्त खाद्य पदार्थ शामिल हो सकते हैं।
फिलहाल जांच रिपोर्ट के आधार पर यह साफ हो चुका है कि जिस तरबूज पर संदेह जताया जा रहा था, उसमें किसी प्रकार की मिलावट नहीं मिली है। अब सभी की नजर रायपुर लैब की रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिससे मामले की पूरी तस्वीर सामने आ सकती है।