अभनपुर: PDS दुकान से निजी पिकअप में हो रही थी चावल की लोडिंग, कांग्रेस पार्षदों ने पकड़ी गाड़ी; खाद्य विभाग जांच में जुटा

अभनपुर: छत्तीसगढ़ के अभनपुर इलाके के गोबरा नवापारा से एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ सरकारी राशन (PDS चावल) को एक निजी पिकअप वाहन में लोड किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। मामले की भनक लगते ही मौके पर पहुंचे पार्षदों और स्थानीय नेताओं ने हंगामा कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने गाड़ी को जब्त कर थाने में खड़ा करवा दिया। अब इस मामले में खाद्य विभाग ने अपनी जांच शुरू कर दी है।

क्या है पूरा मामला?

बुधवार सुबह करीब 8 बजे गोबरा नवापारा में रेलवे क्रॉसिंग के पास स्थित ‘कुमकुम महिला सशक्तिकरण समूह’ द्वारा संचालित उचित मूल्य दुकान (PDS Shop) से चावल की बोरियां एक निजी पिकअप वाहन में लादी जा रही थीं। यह दुकान नगर के वार्ड क्रमांक 20 और 21 के गरीब हितग्राहियों के लिए राशन वितरण का काम करती है।

सुबह-सुबह सरकारी चावल को निजी गाड़ी में लोड होते देख स्थानीय लोगों और कांग्रेसी पार्षदों को शक हुआ। वे तुरंत मौके पर पहुंचे और इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी।

पुलिस और खाद्य विभाग की कार्रवाई

सूचना मिलते ही गोबरा नवापारा थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और स्थिति को संभालते हुए चावल से भरे पिकअप वाहन को अपने कब्जे में ले लिया। वाहन को थाने लाकर खड़ा कर दिया गया है।

घटना के कुछ घंटों बाद सहायक खाद्य निरीक्षक विवेक शुक्ला और खाद्य निरीक्षक श्रद्धा चौहान अपनी टीम के साथ थाने पहुँचे। खाद्य अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर मामले से जुड़े सभी पक्षों के बयान दर्ज किए और दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। हालांकि, खाद्य निरीक्षक श्रद्धा चौहान ने मीडिया से दूरी बनाते हुए कहा कि वह इस मामले में बयान देने के लिए अधिकृत अधिकारी नहीं हैं, लेकिन जांच अभी जारी है।

खड़े हो रहे हैं कई गंभीर सवाल

इस घटना के सामने आने के बाद कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं:

  • क्या यह राशन का नियमित परिवहन था, या फिर इसे अवैध रूप से बाजार में खपाने की तैयारी थी?
  • सरकारी चावल को निजी पिकअप वाहन में ले जाने के लिए क्या कोई वैध अनुमति ली गई थी?
  • क्या इस पूरी प्रक्रिया में पीडीएस (PDS) के नियमों का पालन किया गया था?

फिलहाल, खाद्य विभाग की टीम हर एंगल से मामले की बारीकी से जांच कर रही है। विभाग की फाइनल जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि यह मामला कालाबाजारी का था या प्रशासनिक लापरवाही का।

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