सौर सुजला योजना
सौर सुजला योजना बनी किसानों की ताकत, सुरेन्द्र उईके की आय पहुंची लाखों में
उत्तर बस्तर कांकेर। छत्तीसगढ़ सरकार की सौर सुजला योजना ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों के किसानों के लिए आर्थिक बदलाव की नई कहानी लिख रही है। बिजली की समस्या से जूझ रहे किसानों को अब सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई सुविधा मिल रही है, जिससे उनकी खेती और आय दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम साल्हे निवासी किसान सुरेन्द्र कुमार उईके इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर सामने आए हैं।
सौर सुजला योजना के तहत मिले 3 हार्स पावर के सोलर पंप ने न केवल उनकी खेती को नई दिशा दी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर किसान के रूप में स्थापित कर दिया है। आज वे खेती के साथ-साथ मुर्गी पालन और मछली पालन से भी लाखों रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं।
सोलर पंप ने दूर की बिजली की समस्या
सुरेन्द्र कुमार उईके को शासन द्वारा प्रदत्त वन अधिकार भूमि पर 3 एचपी का सोलर पंप स्थापित करने का लाभ मिला। पहले जहां सिंचाई की सुविधा सीमित थी, वहीं अब सोलर पंप की मदद से खेतों में नियमित पानी उपलब्ध हो रहा है।
सोलर पंप लगने के बाद:
- लो-वोल्टेज की समस्या खत्म हुई
- बिजली कटौती का असर नहीं पड़ता
- बिजली बिल से राहत मिली
- खेती का रकबा और उत्पादन बढ़ा
उन्होंने अपनी टिकरा भूमि को कृषि योग्य बनाकर फसलों का बेहतर उत्पादन शुरू किया।
खेती के साथ शुरू किए नए व्यवसाय
सिंचाई सुविधा मिलने के बाद सुरेन्द्र उईके ने केवल खेती तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने अतिरिक्त आय के लिए मुर्गी पालन और मछली पालन भी शुरू किया।
मुर्गी पालन से हर महीने हजारों की कमाई
वर्तमान में उनके पास लगभग:
- 120 से 150 मुर्गे-मुर्गियां हैं
- स्थानीय बाजार में 600 रुपये प्रति नग की बिक्री होती है
- प्रति माह लगभग 15 हजार रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त होती है
यह व्यवसाय उनके परिवार की नियमित आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन चुका है।
मछली पालन से बढ़ा मुनाफा
सोलर पंप के समीप लगभग 0.75 हेक्टेयर क्षेत्र में तालाब का निर्माण कराया गया है। सोलर पंप की सहायता से तालाब में पानी भरकर मछली पालन किया जा रहा है।
मछली पालन से प्राप्त लाभ:
- प्रति सप्ताह लगभग 50 किलोग्राम मछली उत्पादन
- बाजार में 150 से 250 रुपये प्रति किलो बिक्री
- लगभग 10 हजार रुपये तक अतिरिक्त लाभ
इससे उनकी आय में लगातार वृद्धि हो रही है।
खरीफ और रबी दोनों सीजन में बेहतर उत्पादन
सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने के कारण अब सुरेन्द्र उईके पूरे वर्ष खेती कर पा रहे हैं।
वे वर्तमान में:
- धान जैसी खरीफ फसलें
- चना
- उड़द
- मूंग
- सूरजमुखी
- दलहन एवं तिलहन फसलें
उगा रहे हैं और बाजार में अच्छी कीमत प्राप्त कर रहे हैं।
सालाना 4 से 5 लाख रुपये तक पहुंची आय
सुरेन्द्र उईके बताते हैं कि सोलर पंप लगने के बाद खेती, मुर्गी पालन और मछली पालन से उनकी कुल वार्षिक आय लगभग 4 से 5 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
इस अतिरिक्त आय से:
- परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई
- जीवन स्तर में सुधार आया
- खेती लाभकारी व्यवसाय बनी
- आत्मनिर्भरता बढ़ी
सौर सुजला योजना क्यों है खास?
सौर सुजला योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को सस्ती और स्थायी सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है।
योजना के प्रमुख लाभ:
- बिजली पर निर्भरता कम
- सिंचाई की बेहतर व्यवस्था
- उत्पादन में वृद्धि
- खेती की लागत में कमी
- अतिरिक्त आय के अवसर
- पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा
अन्य किसानों के लिए प्रेरणा
सुरेन्द्र कुमार उईके की सफलता यह साबित करती है कि यदि किसानों को सही संसाधन और तकनीक उपलब्ध कराई जाए तो वे सीमित भूमि में भी बेहतर उत्पादन और अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं। सौर सुजला योजना आज छत्तीसगढ़ के हजारों किसानों के लिए नई उम्मीद और आत्मनिर्भरता का माध्यम बन रही है।
उनकी सफलता की कहानी ग्रामीण किसानों के लिए प्रेरणा है कि आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग करके खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है।