दिव्यांग बेटी
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार दिव्यांगजनों के कल्याण और उनके सम्मानजनक जीवन के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी दिशा में जशपुर जिले से एक संवेदनशील और प्रेरणादायक मामला सामने आया है, जहां प्रशासन की तत्परता से 70 प्रतिशत सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित एक दिव्यांग युवती को सुरक्षित आश्रय और बेहतर देखभाल की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
जशपुर विकासखंड के ग्राम कोमडो निवासी 24 वर्षीय बालती बाई लंबे समय से गंभीर शारीरिक चुनौतियों का सामना कर रही थीं। उनकी माता का पहले ही निधन हो चुका था और बहन की शादी हो जाने के बाद वे अपने वृद्ध पिता सुखराम उरांव के साथ रहती थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनके पिता मजदूरी करने बाहर जाते थे, जिससे बालती बाई को घंटों घर में अकेले रहना पड़ता था।
सुरक्षा और देखभाल बनी बड़ी चिंता
बालती बाई की स्थिति को देखते हुए उनके पिता की सबसे बड़ी चिंता उनकी सुरक्षा और दैनिक देखभाल थी। दिव्यांगता के कारण उन्हें नियमित सहायता की आवश्यकता पड़ती थी, लेकिन घर में कोई अन्य सदस्य मौजूद नहीं था।
स्थिति को गंभीर देखते हुए सुखराम उरांव ने जशपुर कलेक्टर रोहित व्यास के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर अपनी बेटी के लिए सुरक्षित पुनर्वास और देखभाल की व्यवस्था करने की मांग की।
प्रशासन ने दिखाई संवेदनशीलता
मामले की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। कलेक्टर के निर्देश पर समाज कल्याण विभाग ने विभिन्न पुनर्वास संस्थानों से संपर्क किया और बालती बाई के लिए उपयुक्त स्थान तलाशने का प्रयास शुरू किया।
प्रारंभिक प्रयासों में अम्बिकापुर स्थित पुनर्वास केंद्र में स्थान उपलब्ध नहीं हो सका। इसके बाद विभाग ने मनेन्द्रगढ़ जिले के अधिकारियों से समन्वय स्थापित किया और रॉबर्ट कनान संस्था द्वारा संचालित घरौंदा पुनर्वास केन्द्र में प्रवेश की व्यवस्था सुनिश्चित की।
पुनर्वास केन्द्र में मिला सुरक्षित आश्रय
18 जून 2026 को बालती बाई को मनेन्द्रगढ़ स्थित घरौंदा पुनर्वास केन्द्र में भर्ती कराया गया। यहां उन्हें पूरी तरह निःशुल्क सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
केन्द्र में मिलने वाली प्रमुख सुविधाएं:
- सुरक्षित और संरक्षित आवास
- पौष्टिक भोजन
- नियमित स्वास्थ्य देखभाल
- विशेष जरूरतों के अनुरूप सहायता
- सामाजिक और भावनात्मक सहयोग
- पुनर्वास संबंधी सेवाएं
इन सुविधाओं के मिलने से बालती बाई के जीवन में नई उम्मीद जगी है और उनके परिवार को भी बड़ी राहत मिली है।
पिता ने जताया आभार
अपनी बेटी को सुरक्षित वातावरण और बेहतर देखभाल मिलने के बाद सुखराम उरांव ने जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अब उन्हें अपनी बेटी की सुरक्षा और भविष्य को लेकर पहले जैसी चिंता नहीं रहेगी।
मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में दिव्यांगजन
राज्य सरकार लगातार दिव्यांगजनों के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है ताकि उन्हें सम्मानजनक जीवन और बेहतर अवसर मिल सकें। प्रशासन की यह पहल दर्शाती है कि जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाने के लिए शासन संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रहा है।
मुख्य बातें
- जशपुर की 24 वर्षीय दिव्यांग बालती बाई को मिला सुरक्षित आश्रय।
- 70 प्रतिशत सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित हैं बालती बाई।
- वृद्ध पिता की चिंता को प्रशासन ने किया दूर।
- कलेक्टर रोहित व्यास के निर्देश पर हुई त्वरित कार्रवाई।
- मनेन्द्रगढ़ के घरौंदा पुनर्वास केन्द्र में कराया गया प्रवेश।
- निःशुल्क आवास, भोजन और स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं।
- परिवार ने प्रशासन और समाज कल्याण विभाग का जताया आभार।
यह पहल केवल एक दिव्यांग बेटी को आश्रय देने की कहानी नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक संवेदनशीलता, मानवीय दृष्टिकोण और सामाजिक जिम्मेदारी का भी उत्कृष्ट उदाहरण है। इससे यह संदेश जाता है कि जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाने के लिए शासन और प्रशासन पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहे हैं।