कांकेर में खाद संकट के बीच बड़ा खुलासा, समितियों में 30 हजार टन से ज्यादा खाद उपलब्ध, 21 हजार टन किसानों तक पहुंची

खाद वितरण

उत्तर बस्तर कांकेर, खरीफ सीजन के दौरान खाद की उपलब्धता को लेकर उठ रहे सवालों और विरोध प्रदर्शनों के बीच कृषि विभाग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए महत्वपूर्ण आंकड़े जारी किए हैं। विभाग के अनुसार कांकेर जिले की सभी सहकारी समितियों में किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों का भंडारण किया गया है और लगातार वितरण की प्रक्रिया जारी है।

कृषि विभाग के उप संचालक जितेन्द्र कोमरा ने बताया कि खरीफ वर्ष 2026 के लिए जिले की सहकारी समितियों में कुल 30 हजार 393.514 मेट्रिक टन खाद का भंडारण किया गया है। इनमें से अब तक 21 हजार 288.995 मेट्रिक टन खाद किसानों को वितरित भी की जा चुकी है।

खाद की उपलब्धता पर विभाग का दावा

हाल के दिनों में कुछ समाचार पत्रों में “खाद के लिए भटक रहे किसान” और “खाद संकट को लेकर प्रदर्शन” जैसी खबरें प्रकाशित हुई थीं। इन खबरों के बाद कृषि विभाग ने उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर बताया कि जिले में उर्वरकों की आपूर्ति और वितरण व्यवस्था नियमित रूप से संचालित की जा रही है।

विभाग के अनुसार किसानों को उनकी आवश्यकता और वैज्ञानिक अनुशंसाओं के आधार पर खाद उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे उर्वरकों का संतुलित और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हो सके।

पीढ़ापाल समिति में लक्ष्य का 44 प्रतिशत भंडारण

आदिम जाति सेवा सहकारी समिति पीढ़ापाल के संबंध में भी विभाग ने विस्तृत जानकारी दी है।

  • समिति के लिए 500 मेट्रिक टन खाद का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।
  • इसके विरुद्ध अब तक 217.55 मेट्रिक टन खाद का भंडारण किया गया है।
  • यह निर्धारित लक्ष्य का लगभग 44 प्रतिशत है।
  • समिति के माध्यम से अब तक 150.59 मेट्रिक टन खाद किसानों को वितरित की जा चुकी है।

वैज्ञानिक अनुशंसा के अनुसार हो रहा वितरण

कृषि विभाग का कहना है कि किसानों को उर्वरकों का वितरण वैज्ञानिकों द्वारा निर्धारित अनुशंसित मात्रा के आधार पर किया जा रहा है। इससे एक ओर जहां किसानों को आवश्यक मात्रा में खाद उपलब्ध हो रही है, वहीं दूसरी ओर उर्वरकों के संतुलित उपयोग को भी बढ़ावा मिल रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार आवश्यकता से अधिक रासायनिक उर्वरकों का उपयोग मिट्टी की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसी कारण वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप वितरण व्यवस्था अपनाई जा रही है।

खरीफ सीजन में बढ़ती मांग पर प्रशासन की नजर

खरीफ फसल सीजन के दौरान खाद की मांग तेजी से बढ़ती है। ऐसे में प्रशासन और कृषि विभाग लगातार समितियों में उपलब्ध स्टॉक और वितरण व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं ताकि किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध हो सके और खेती प्रभावित न हो।

विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार समितियों से खाद प्राप्त करें और किसी भी प्रकार की अफवाहों या भ्रामक सूचनाओं पर ध्यान न दें।

कृषि विभाग का दावा है कि जिले में खाद की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है, जिससे खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

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