सेंट्रल लाइब्रेरी
उत्तर बस्तर कांकेर, 25 जून 2026
कभी न्यायिक गतिविधियों का केंद्र रही कांकेर की ऐतिहासिक पुरानी कचहरी आज शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और आदिवासी संस्कृति के संरक्षण का नया केंद्र बनकर उभर रही है। जिला प्रशासन की पहल से विकसित सेंट्रल लाइब्रेरी सह मावा मोदोल अब हजारों युवाओं के सपनों को नई दिशा देने का माध्यम बन चुकी है।
प्रतिदिन लगभग 1000 विद्यार्थी यहां अध्ययन के लिए पहुंच रहे हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर अपने भविष्य को संवारने में जुटे हैं। शांत वातावरण, आधुनिक सुविधाएं और विशेषज्ञ मार्गदर्शन इस केंद्र को जिले के सबसे महत्वपूर्ण अध्ययन स्थलों में शामिल कर चुके हैं।
प्रतिदिन 1000 विद्यार्थी कर रहे हैं तैयारी
जिला प्रशासन की महत्वाकांक्षी पहल “हमर लक्ष्य” के तहत विकसित इस अध्ययन केंद्र में वर्तमान में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं अध्ययन कर रहे हैं।
यहां विशेष रूप से निम्न परीक्षाओं की तैयारी कराई जा रही है—
- छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC)
- उप निरीक्षक भर्ती परीक्षा
- विभिन्न विभागीय भर्ती परीक्षाएं
- अन्य प्रतियोगी परीक्षाएं
उप निरीक्षक भर्ती परीक्षा के लिए आयोजित मैराथन क्लासेस का लाभ भी बड़ी संख्या में अभ्यर्थी उठा रहे हैं।
89 युवाओं ने हासिल की सरकारी नौकरी
इस अध्ययन केंद्र की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि यहां अध्ययन कर चुके 89 युवाओं ने विभिन्न शासकीय सेवाओं में सफलता प्राप्त की है।
यह उपलब्धि न केवल विद्यार्थियों के परिश्रम को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि यदि सही मार्गदर्शन और बेहतर वातावरण मिले तो छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के युवा भी बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।
शिक्षा के साथ संस्कृति संरक्षण का भी केंद्र
पुरानी कचहरी परिसर केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आदिवासी संस्कृति और भाषाओं के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
परिसर में स्थापित कोयाबाना आदिवासी संग्रहालय स्थानीय जनजातीय समाज की—
- संस्कृति
- परंपराएं
- इतिहास
- जीवनशैली
- लोक विरासत
को संरक्षित और प्रदर्शित करने का कार्य कर रहा है।
गोंडी और हल्बी भाषा सीख रही नई पीढ़ी
नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के लिए यहां गोंडी और हल्बी भाषाओं का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
वर्तमान में लगभग 80 विद्यार्थी इन भाषाओं का अध्ययन कर रहे हैं। यह पहल स्थानीय भाषाओं और आदिवासी पहचान को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
ऐतिहासिक परिसर बना आकर्षण का केंद्र
पुरानी कचहरी परिसर का ऐतिहासिक प्रवेश द्वार, हरियाली से भरपूर उद्यान और स्वच्छ वातावरण यहां आने वाले विद्यार्थियों, अभिभावकों और पर्यटकों को आकर्षित करता है।
शिक्षा, संस्कृति और विरासत का यह अनूठा संगम कांकेर को प्रदेश में एक नई पहचान दिला रहा है।
युवाओं के सपनों को मिल रही नई दिशा
जिला प्रशासन का यह प्रयास केवल एक पुस्तकालय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन युवाओं के सपनों को आकार देने का मंच बन चुका है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ी उपलब्धियां हासिल करना चाहते हैं।
आज सेंट्रल लाइब्रेरी सह मावा मोदोल न केवल एक अध्ययन केंद्र है, बल्कि यह विकसित और शिक्षित छत्तीसगढ़ की नई तस्वीर भी प्रस्तुत कर रहा है।