अल नीनो का असर बढ़ा सकता है पशुओं का संकट, कांकेर में पशुपालकों को जारी हुई जरूरी एडवाइजरी

अल नीनो

उत्तर बस्तर कांकेर, 25 जून 2026

जलवायु परिवर्तन से जुड़ी वैश्विक घटना अल नीनो का असर इस वर्ष पशुपालन और कृषि क्षेत्र पर भी दिखाई दे सकता है। संभावित कम वर्षा और सूखे जैसी परिस्थितियों को देखते हुए पशुधन विकास विभाग ने पशुपालकों को समय रहते आवश्यक तैयारियां करने और पशुओं की सुरक्षा के लिए विशेष उपाय अपनाने की सलाह दी है।

पशुधन विकास विभाग के उप संचालक डॉ. सत्यम मित्रा ने बताया कि अल नीनो के प्रभाव से वर्षा के पैटर्न और तापमान में बदलाव होने की संभावना रहती है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस वर्ष प्रदेश के कई जिलों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज हो सकती है। कांकेर जिले के कुछ विकासखंडों में भी पिछले वर्षों की तुलना में वर्षा का प्रतिशत कम दर्ज किया गया है, जिससे भविष्य में सूखे जैसी स्थिति बनने की आशंका है।

पशुओं के लिए बढ़ सकती है चारे की समस्या

कम बारिश का सीधा असर पशुओं के चारे और घास के उत्पादन पर पड़ता है। यदि समय रहते तैयारी नहीं की गई तो पशुपालकों को चारे की कमी का सामना करना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों ने पशुपालकों को निम्न उपाय अपनाने की सलाह दी है—

  • पर्याप्त मात्रा में सूखा चारा और घास का भंडारण करें।
  • साइलेज तैयार कर सुरक्षित रखें।
  • यूरिया उपचारित पैरा का संग्रह करें।
  • अजोला आधारित चारे का उपयोग बढ़ाएं।
  • सोरगम, बाजरा और लोबिया जैसी सूखा सहन करने वाली फसलों का उत्पादन करें।
  • चारे की कमी होने पर बबूल और पीपल जैसे पौष्टिक पेड़ों की पत्तियों को आहार में शामिल करें।

पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी

सूखे की स्थिति में पशुओं के लिए पेयजल की उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है। विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि वे—

  • पानी की टंकियों और कुओं की नियमित सफाई करें।
  • पशुओं के लिए पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी उपलब्ध रखें।
  • पानी को छायादार स्थान पर सुरक्षित रखें।
  • जल संरक्षण के उपाय अपनाएं।

हीट स्ट्रेस और बीमारियों का बढ़ सकता है खतरा

अत्यधिक गर्मी और तापमान बढ़ने से पशुओं में हीट स्ट्रेस की समस्या बढ़ सकती है, जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है।

इससे बचाव के लिए विभाग ने निम्न सलाह जारी की है—

  • पशुओं का समय पर टीकाकरण कराएं।
  • नियमित रूप से कृमिनाशक दवाओं का उपयोग करें।
  • पशुओं को तेज धूप में खुला न छोड़ें।
  • अत्यधिक गर्मी के समय उनसे अधिक काम न लें।
  • बीमार पशुओं का तुरंत उपचार कराएं।

पशुधन बीमा कराने की भी सलाह

संभावित प्राकृतिक आपदाओं और सूखे की स्थिति को देखते हुए पशुपालकों को पशुधन बीमा कराने की सलाह भी दी गई है। इसके लिए निकटतम पशु चिकित्सा संस्थान से संपर्क किया जा सकता है।

इन चारा फसलों का उत्पादन सीमित रखें

विभाग ने ऐसे हरे चारे के उत्पादन को सीमित रखने की सलाह दी है, जिनमें अधिक पानी की आवश्यकता होती है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

  • सुपर नेपियर
  • पैरा घास
  • बरसीम
  • मक्का चारा

इनकी जगह कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है।

समय रहते तैयारी ही सबसे बड़ा बचाव

विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो के संभावित प्रभावों से पशुधन को बचाने के लिए समय पर योजना बनाना और संसाधनों का प्रबंधन करना सबसे महत्वपूर्ण है।

यदि पशुपालक अभी से चारे, पानी, टीकाकरण और स्वास्थ्य प्रबंधन पर ध्यान दें, तो संभावित सूखे की स्थिति में भी पशुधन को सुरक्षित रखा जा सकता है।

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