केमिकल से पके आम
आम को फलों का राजा कहा जाता है और गर्मियों के मौसम में इसकी मांग सबसे ज्यादा रहती है। मीठे स्वाद और खुशबू से भरपूर आम बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को पसंद आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बाजार में मिलने वाले कई आम प्राकृतिक रूप से नहीं बल्कि केमिकल की मदद से पकाए जाते हैं? ऐसे आम दिखने में आकर्षक जरूर लगते हैं, लेकिन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं।
हाल ही में कई शहरों में खाद्य सुरक्षा विभाग ने बड़ी मात्रा में संदिग्ध रूप से केमिकल से पकाए गए आम जब्त किए हैं। ऐसे में आम खरीदते समय थोड़ी सावधानी बरतना बेहद जरूरी हो गया है।
आम पकाने के लिए कौन-सा केमिकल इस्तेमाल किया जाता है?
कुछ व्यापारी आमों को जल्दी पकाने और बाजार में जल्द बेचने के लिए कैल्शियम कार्बाइड जैसे प्रतिबंधित रसायनों का इस्तेमाल करते हैं। यह रसायन फल को तेजी से पकाने का काम करता है, लेकिन इसके अवशेष शरीर के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे फलों के लगातार सेवन से कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जैसे—
- सिरदर्द
- चक्कर आना
- पेट दर्द
- उल्टी और मतली
- सांस लेने में परेशानी
- पाचन संबंधी दिक्कतें
इन 3 तरीकों से पहचानें केमिकल से पके आम
1. रंग को ध्यान से देखें
प्राकृतिक रूप से पके आमों का रंग पूरी तरह एक जैसा नहीं होता। इनमें हल्का हरा, पीला और नारंगी रंग मिला-जुला दिखाई देता है।
वहीं केमिकल से पकाए गए आम अक्सर बहुत ज्यादा चमकीले और एक समान पीले दिखाई देते हैं। यदि सभी आम एक जैसे रंग के दिखें तो सावधान रहने की जरूरत है।
2. दबाकर करें जांच
आम खरीदते समय उसे हल्के हाथों से दबाकर देखें।
- प्राकृतिक रूप से पका आम हल्का नरम महसूस होगा।
- केमिकल से पका आम बाहर से सख्त लेकिन अंदर से अधिक मुलायम या गला हुआ हो सकता है।
- ऐसे आमों का स्वाद भी कई बार फीका या अस्वाभाविक लगता है।
3. काले धब्बों और निशानों पर नजर रखें
आम के डंठल या सतह पर बने असामान्य काले धब्बे, दबे हुए निशान या छोटे छेद कई बार रासायनिक प्रक्रिया का संकेत हो सकते हैं।
हालांकि हर काला निशान केमिकल का प्रमाण नहीं होता, लेकिन ऐसे आमों को खरीदते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
सुरक्षित आम खरीदने के लिए अपनाएं ये टिप्स
- भरोसेमंद दुकानदार से ही आम खरीदें।
- बहुत ज्यादा चमकदार और एक जैसे रंग वाले आमों से बचें।
- खरीदने के बाद आम को अच्छी तरह धोकर ही खाएं।
- कटने पर यदि आम से अजीब गंध आए तो उसका सेवन न करें।
- स्थानीय और मौसमी आमों को प्राथमिकता दें।