फाइलेरिया और मलेरिया नियंत्रण
छत्तीसगढ़ की जनस्वास्थ्य में नवाचार: राष्ट्रीय मंच पर मिली सराहना
रायपुर, 30 अप्रैल और 1 मई 2026 को चंडीगढ़ में आयोजित “National Summit on Innovation and Inclusivity – Best Practices Shaping India’s Future” में छत्तीसगढ़ ने एक महत्वपूर्ण पहचान बनाई। राज्य को फाइलेरिया और मलेरिया उन्मूलन के लिए की गई नवाचारी पहलों पर सम्मानित किया गया। यह सम्मान केवल राज्य की स्वास्थ्य रणनीतियों की प्रभावशीलता को ही नहीं, बल्कि सामुदायिक भागीदारी आधारित मॉडल की सफलता को भी साबित करता है।
फाइलेरिया उन्मूलन में BIHAN मॉडल की सफलता
BIHAN (State Rural Livelihoods Mission) के तहत महिलाओं की स्व-सहायता समूहों ने फाइलेरिया उन्मूलन अभियान में अहम भूमिका निभाई। Mission Steering Group–Human Resource (MSG–HR) के अंतर्गत इस मॉडल को देश की सबसे प्रभावी और समावेशी पहल के रूप में मान्यता मिली। इस प्रयास में PCI India का तकनीकी सहयोग भी बहुत महत्वपूर्ण रहा।
मुख्य बिंदु:
- महिलाओं ने मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (MDA) अभियान के तहत घर-घर जाकर दवा का सेवन सुनिश्चित किया।
- सामुदायिक बैठकों और जागरूकता कार्यक्रमों ने लोगों में विश्वास और सहयोग बढ़ाया।
- इसके परिणामस्वरूप, दवा सेवन से इनकार करने वाले 74% लोगों को सहमति मिली, जो इस मॉडल की सबसे बड़ी सफलता रही।
‘मलेरिया मुक्त बस्तर’ – आदिवासी क्षेत्रों में सफलता की मिसाल
‘मलेरिया मुक्त बस्तर’ अभियान को राष्ट्रीय मंच पर विशेष सराहना मिली। बस्तर के दूरदराज इलाकों में चलाए गए इस अभियान के तहत घर-घर स्क्रीनिंग, रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (RDT) और त्वरित उपचार ने परिणामों को बेहतर बनाया।
मुख्य उपलब्धियां:
- लक्षणहीन मलेरिया मरीजों की पहचान और उपचार।
- घर-घर स्क्रीनिंग और समय पर इलाज ने संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद की।
- राज्य का API 2019 में 1.97 से घटकर 2025 में 0.90 हो गया, जबकि बस्तर क्षेत्र में यह 13.12 से घटकर 6.98 तक पहुँच गया।
अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा स्रोत
राष्ट्रीय मंच पर विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने BIHAN मॉडल और ‘मलेरिया मुक्त बस्तर’ पहल को अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय बताया। ये पहलें यह साबित करती हैं कि जनभागीदारी और स्थानीय रणनीतियों के माध्यम से जटिल स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान संभव है।
अनुकरणीय पहलें:
- कम लागत, उच्च प्रभाव – ये मॉडल सीमित संसाधनों में भी बड़े परिणाम देने में सक्षम हैं।
- सामुदायिक भागीदारी – लोगों की सक्रिय भूमिका ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया।
भविष्य की दिशा
राज्य सरकार ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में भी सामुदायिक आधारित और नवाचारयुक्त रणनीतियों पर जोर दिया जाएगा, जिससे जनस्वास्थ्य सेवाएं और अधिक सुदृढ़ हो सकेंगी।