ईरान के एक फैसले से बढ़ी चिंता: भारत के बासमती चावल-चाय कारोबार को लग सकता है झटका, कीमतों में गिरावट का डर

इस्राइल के लेबनान पर हमलों का हवाला देते हुए ईरान ने होर्मुज समुद्री मांग को बंद करने का एलान कर दिया है। इस कदम से भारत के बासमती चावल (Basmati Rice) और चाय के निर्यात पर चोट पहुंच सकती है। होर्मुज समुद्री मार्ग (Strait of Hormuz) भारत और खाड़ी देशों के बीच व्यापार का अहम रास्ता है। इस रास्ते के बाधित होन से भारतीय किसानों और निर्यातकों को नुकसान उठाना पड़ेगा।

इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के उपाध्यक्ष देव गर्ग कहते हैं कि हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के एलान के बाद खाड़ी देशों को निर्यात करने के लिए निर्यातकों ने बड़ी मात्रा में बासमती चावल की खरीद की थी। इस एलान ने बासमती चावल की कीमतों को भी 15 से 20 प्रतिशत बढ़ा दिया था। लेकिन, इरान के इस एलान से कीमतों दोबारा नीचे आएंगी। निर्यातकों को डर है कि पश्चिम एशिया से व्यापार न होने पर बासमती कीमतों में 5-10 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। वर्तमान में पश्चिम एशिया के बाजारों के लिए भेजा गया लगभग 60,000 टन बासमती चावल रास्ते में है।

भारत हर साल 72 लाख टन बासमती चावल का उत्पादन करता है, जिसमें से करीब 60 लाख टन नरि्यात किया जाता है। इस खास चावल के टॉप विदेशी खरीदारों में सबसे पहले आंकड़ों के अनुसार, भारत सालाना लगभग 7.2 मिलियन (72 लाख) टन बासमती चावल सऊदी अरब, ईरान, इराक, यूएई (UAE) और यमन का नाम आता है।

आंकड़ो के अनुसार, भारत के कुल चावल निर्यात का फीसदी हिस्सा इन्हीं देशों को भेजा जाता है।

पश्चिम एशिया भारतीय चाय के लिए भी एक बहुत बड़ा निर्यात बाजार है। इस क्षेत्र के उपभोक्ता मुख्य रूप से भारत की सेकंड-फ्लश प्रीमियम ऑर्थोडॉक्स चाय को काफी पसंद करते हैं। आमतौर पर इसके ऑर्डर मई के अंत से आने शुरू हो जाते हैं और जून की शुरुआत से इसकी खेप भेजी जाती है। यह खास चाय देश के लिए विदेशी मुद्रा कमाने का एक बड़ा जरिया है।

एशियन टी एंड एक्सपोर्ट्स के निदेशक मोहित अग्रवाल के अनुसार, पश्चिम एशिया के संकट के कारण भारत के चाय निर्यात को बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, जबकि साल 2019 में भारत का चाय निर्यात 28.5 करोड़ किलो के रिकॉर्ड पर पहुंच गया था। जानकारों के अनुसार, भारत से भेजी जाने वाली करीब 50 प्रतिशत चाय पश्चिम एशियाई देशों में जाती है। होर्मुज की नाकेबंदी और लाल सागर (Red Sea) के बंदरगाहों से मालभाड़े में हुई भारी बढ़ोतरी के कारण हमारा निर्यात लगभग ठप हो गया है।

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