राज्यसभा की 27 सीटों पर हुए चुनाव के बाद NDA यानी नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस की सीटों में और इजाफा हो गया है। इसके साथ ही गठबंधन उच्च सदन में दो तिहाई बहुमत के और नजदीक पहुंच गया है। हालांकि, अभी आंकड़ा दूर है, लेकिन अटकलें हैं कि ताजा राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद गठबंधन की सीटें और भी बढ़ कती है। फिलहाल, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
इसकी वजह तृणमूल कांग्रेस में जारी राजनीतिक संकट हो सकती है। दरअसल, पार्टी के उच्च सदन में कुल 13 सांसद थे, जिनमें से 4 इस्तीफा दे चुके हैं। अब संभावनाएं जताई जा रही हैं कि इन चारों सीटों पर भाजपा आसानी से जीत दर्ज कर सकती है। इस्तीफा देने वालों में सुखेंदु शेखर रे, सुष्मिता देव, कोयल मलिक और प्रकाश बरिक हैं।
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, अटकलें ये भी लगाई जा रही हैं कि आने वाले कुछ दिनों में टीएमसी के और भी राज्यसभा सांसद इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि, अब तक यह साफ नहीं है कि इन सांसदों की संख्या कितनी होगी। फिलहाल, पार्टी के पास 9 सांसद बचे हैं।
हाल ही में 27 सीटों पर हुए राज्यसभा चुनावों में एनडीए ने 19 सीटें अपने नाम की थीं। 245 सीटों वाले उच्च सदन में गठबंधन 152 पर पहुंच गया है। यहां बहुमत का आंकड़ा 164 है। अब अगर चार और सांसद जुड़ते हैं, तो गठबंधन 156 पर पहुंच जाएगा। वहीं, अगर टीएमसी में टूट जारी रहती है तो संख्या 164 के करीब पहुंच सकती है।
हाल ही में राघव चड्ढा, हरभजन सिंह समेत आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों ने भाजपा का दामन था लिया था, जिसके चलते एनडीए का सबसे बड़ा दल 110 के पार पहुंच गया था।
ताजा आंकड़े बताते हैं कि राज्यसभा में 115 सदस्यों के साथ भाजपा सबसे बड़ा दल है। इसके बाद तेलुगु देशम पार्टी, जनता दल यूनाइटेड, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 4-4 सांसद हैं। शिवसेना के 2 हैं और पवन कल्याण की अगुवाई वाली जनसेना के 1 सांसद हैं। सदन में नॉमिनेटेड सदस्य 7 और निर्दलीय 4 हैं।
मिजोरम से हाल ही में राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुए के. लालतलुआंगकिमा ने शुक्रवार को कहा कि वह राज्य के विकास और लोगों के कल्याण से जुड़े मुद्दों पर एनडीए का समर्थन करेंगे। जेडपीएम एक क्षेत्रीय दल है, जिसकी स्थापना 2017 में हुई थी। यह पार्टी न तो NDA और न ही विपक्षी INDIA गठबंधन के साथ है। जेडपीएम नेता ने कहा कि वह और पार्टी के एकमात्र लोकसभा सदस्य रिचर्ड वानलालहमंगाइहा संसद में तटस्थ रहेंगे।