नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलने की संभावना है। इस बारे में एक प्रस्ताव संसदीय मामलों की कैबिनेट कमेटी के सामने रखा गया है। माना जा रहा है कि मानसून सत्र में बीजेपी की अगुवाई वाले NDA और कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया ब्लॉक के बीच टकराव के तीन सबसे अहम मुद्दे हो सकते हैं।
मानसून सत्र: ये तीन मुद्दे ऐसे हैं, जिन पर असहज होगा NDA
- मानसून सत्र में सत्ताधारी एनडीए और कांग्रेस की अगुवाई वाले इंडिया ब्लॉक में टकराव होने की सबसे ज्यादा आशंका है। तीन मुद्दे ऐसे हैं, जिन पर कांग्रेस की अगुवाई में विपक्ष बीजेपी के नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस (NDA) को उलझा सकता है।
- ये मुद्दे हैं 33 फीसदी महिला आरक्षण बिल, NEET पेपर लीक और तृणमूल और शिवसेना (UBT) से हाल ही में हुआ दल-बदल। इन मुद्दों पर पहले ही बीजेपी घिरी हुई है। खासतौर पर नीट पेपर लीक और दल-बदल के मुद्दे के चलते मानसून सत्र के हंगामेदार होने के आसार हैं।
मानसून सत्र में संविधान संशोधन बिल आएगा या नहीं?
- मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में राज्यसभा के नए सदस्यों के शपथ लेने के बाद एनडीए के संख्या बल में इजाफा हो सकता है। ऐसे में आगामी मानसून सत्र में सबकी नजर इस बात पर होगी कि क्या सरकार संविधान संशोधन बिल को आगे बढ़ाने की एक और कोशिश करती है या नहीं।
- संविधान संशोधन बिल का मकसद लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों की संख्या में एक समान 50 फीसदी की बढ़ोतरी करना है, ताकि 33 फीसदी महिला आरक्षण को लागू किया जा सके।
DMK नहीं बैठेगी कांग्रेस के साथ!
- NEET पेपर लीक के मुद्दे पर भी विपक्ष के सरकार को घेरने की उम्मीद है। तृणमूल और शिवसेना (UBT) से हाल ही में हुए दल-बदल का मुद्दा भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव का एक और कारण बन सकता है।
- उम्मीद है कि सत्र शुरू होने से पहले स्पीकर दल-बदल करने वाले सांसदों की मान्यता के बारे में फैसला लेंगे। इसी फैसले से तय होगा कि वे सदन में कहां बैठेंगे। उम्मीद है कि DMK कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गुट के साथ बैठने के बजाय अलग बैठेगी।