महासमुंद। ग्रामीण विकास को नई दिशा देने और पंचायतों को अधिक सक्षम बनाने की दिशा में महासमुंद जिला पंचायत में एक महत्वपूर्ण जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वराज अभियान योजना के अंतर्गत आयोजित इस एक दिवसीय प्रशिक्षण का उद्देश्य 16वें वित्त आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पंचायत विकास योजना (GPDP) को प्रभावी ढंग से लागू करना था।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को ग्राम पंचायत स्तर पर सहभागी, समावेशी और जरूरत आधारित विकास योजनाएं तैयार करने की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि यदि पंचायत विकास योजना को सही तरीके से लागू किया जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पेयजल और आधारभूत सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार संभव है।
बड़ी संख्या में अधिकारी हुए शामिल
प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। इनमें प्रमुख रूप से:
- सभी जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी
- वरिष्ठ करारोपण अधिकारी
- विकासखंड शिक्षा अधिकारी
- चिकित्सा अधिकारी
- ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के उपखंड अधिकारी
- महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी
- मनरेगा कार्यक्रम अधिकारी
- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के प्रतिनिधि
- स्वच्छ भारत मिशन के कार्यक्रम प्रबंधक
सहित अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
पंचायत विकास योजना क्या है?
पंचायत विकास योजना ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके तहत ग्राम पंचायतें अपने क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों का आकलन कर विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करती हैं।
इस योजना के माध्यम से:
- स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास कार्य तय किए जाते हैं।
- ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित होती है।
- उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जाता है।
- शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर फोकस किया जाता है।
- गांवों के सतत और संतुलित विकास को बढ़ावा मिलता है।
विशेषज्ञों ने दी विस्तृत जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की उपसंचालक श्रीमती दीप्ति साहू, जिला समन्वयक श्री योगेश साहू और पीरामल फाउंडेशन के प्रतिनिधि श्री महेंद्र आर्या ने प्रतिभागियों को पंचायत विकास योजना की पूरी प्रक्रिया समझाई।
उन्होंने निम्न विषयों पर विस्तार से जानकारी दी:
- ग्राम पंचायत विकास योजना तैयार करने की प्रक्रिया
- 16वें वित्त आयोग के दिशा-निर्देश
- स्थानीय समस्याओं की पहचान
- विभागीय समन्वय की भूमिका
- योजनाओं की प्राथमिकता निर्धारण
- जनभागीदारी को बढ़ाने के उपाय
जनभागीदारी से होगा गांवों का विकास
प्रशिक्षकों ने कहा कि किसी भी विकास योजना की सफलता तभी संभव है जब उसमें स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी हो। पंचायत विकास योजना का मुख्य उद्देश्य भी यही है कि ग्रामीण स्वयं अपने गांव के विकास की दिशा तय करें और योजनाओं के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।
उन्होंने अधिकारियों को यह भी बताया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, जवाबदेही और नियमित निगरानी बेहद आवश्यक है।
ग्रामीण विकास को मिलेगी नई गति
विशेषज्ञों के अनुसार पंचायत विकास योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से गांवों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार आएगा। साथ ही सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।
महासमुंद में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पंचायतों को अधिक सशक्त, जवाबदेह और विकासोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इससे जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।