भूपेश बघेल
नगरी क्षेत्र के सीतानदी-उदंती टाइगर रिजर्व के भीतर बसे 60 से अधिक गांवों की समस्याएं अब प्रदेश की राजनीति और विधानसभा तक पहुंचने वाली हैं। वर्षों से मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा और परेशानियों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात की और विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
ग्रामीणों और जल, जंगल, जमीन संघर्ष समिति का आरोप है कि आजादी के कई दशक बाद भी इन गांवों तक विकास की रोशनी पूरी तरह नहीं पहुंच पाई है। सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य और आवास जैसी बुनियादी सुविधाएं आज भी लोगों के लिए सपना बनी हुई हैं।
क्या हैं ग्रामीणों की प्रमुख समस्याएं?
प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व मुख्यमंत्री के सामने कई गंभीर मुद्दे रखे। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं-
- गांवों तक पक्की सड़क और पुल-पुलिया का अभाव।
- कई क्षेत्रों में बिजली और सोलर लाइट की व्यवस्था नहीं।
- स्वच्छ पेयजल की भारी कमी।
- स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाल स्थिति।
- आवास और आंगनबाड़ी भवन निर्माण कार्यों में देरी।
- वन विभाग की अनुमति के कारण विकास कार्यों का प्रभावित होना।
ग्रामीणों का कहना है कि विकास योजनाएं कागजों में तो दिखाई देती हैं, लेकिन जमीन पर उनका लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
वन विभाग पर लगाए गए गंभीर आरोप
संघर्ष समिति ने यह भी आरोप लगाया कि कई जरूरी विकास कार्य वन स्वीकृति के नाम पर वर्षों से लंबित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण, बिजली विस्तार और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में लगातार बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं।
उनका दावा है कि यदि समय पर अनुमति और प्रशासनिक सहयोग मिले तो क्षेत्र के हजारों लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो सकता है।
जैतपुरी घटना ने बढ़ाई नाराजगी
प्रतिनिधिमंडल ने नगरी ब्लॉक के जैतपुरी गांव में हुई हालिया घटना का मुद्दा भी उठाया। ग्रामीणों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान महिलाओं और बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की गई।
ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए न्याय की गुहार लगाई।
बोराई अस्पताल की हालत पर चिंता
बैठक के दौरान बोराई सिविल अस्पताल की स्थिति को भी गंभीर बताया गया। ग्रामीणों के अनुसार अस्पताल में पर्याप्त डॉक्टर नहीं हैं और कई आवश्यक उपकरण लंबे समय से बंद पड़े हैं।
स्थिति यह है कि गंभीर मरीजों को उपचार के लिए लगभग 80 किलोमीटर दूर धमतरी भेजना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण कई मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने दिया बड़ा भरोसा
ग्रामीणों की समस्याओं को सुनने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर जानकारी ली और आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया।
उन्होंने आश्वासन दिया कि-
- आदिवासी क्षेत्रों की समस्याओं को विधानसभा में उठाया जाएगा।
- स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति पर जवाब मांगा जाएगा।
- जैतपुरी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की जाएगी।
- विकास कार्यों में आने वाली बाधाओं को दूर करने के प्रयास किए जाएंगे।
बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीण
प्रतिनिधिमंडल में संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के साथ नगरी और सिहावा क्षेत्र के अनेक ग्रामीण शामिल रहे। सभी ने एक स्वर में अपनी समस्याओं को रखा और उम्मीद जताई कि उनकी आवाज अब शासन और प्रशासन तक प्रभावी ढंग से पहुंचेगी।
वनांचल के इन गांवों के लिए यह मुलाकात केवल एक राजनीतिक बैठक नहीं बल्कि वर्षों से चली आ रही समस्याओं को समाधान की दिशा में ले जाने की एक नई शुरुआत मानी जा रही है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या सचमुच इन गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकेगा।