भारत-म्यांमार सीमा के पास स्थित मणिपुर के कामजोंग जिले में बुधवार को हिंसा भड़क गई। मणिपुर में नागा और कुकी समूहों के बीच सशस्त्र झड़पों के कारण 20 से अधिक घरों में आग लगा दी गई, जिससे हिंसा भड़क उठी और तनावपूर्ण माहौल बन गया।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि, हिंसा सुबह उस समय शुरू हुई जब कथित तौर पर हथियारबंद लोगों ने पास के एक कुकी गांव से एक नागा गांव पर हमला कर दिया और कम से कम 10 घरों को आग के हवाले कर दिया। दोपहर में स्थिति और भी बिगड़ गई जब संदिग्ध उग्रवादियों और सशस्त्र ग्राम स्वयंसेवकों ने कथित तौर पर क्षेत्र के बाकी गांवों पर जवाबी हमला किया। इन हमलों ने झड़प सुलझाने की जगह उसे और हवा दे दी।
नागा समुदाय के 12 घर फूंक दिए
दोपहर में हुई हिंसा में नागा समुदाय के कम से कम 12 और घर जला दिए गए। हिंसक झड़प की खबर मिलते ही सुरक्षा बलों को प्रभावित गांवों में भेजा गया और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए क्षेत्र नियंत्रण अभियान चलाया गया। अधिकारियों के अनुसार, स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है, लेकिन सुरक्षा बल पूर मुश्तैदी के साथ कड़ी निगरानी रख रहे है। किसी भी तरह की और हिंसा को रोकने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं।
हाल ही में नागा और कुकी समुदायों में तनाव बढ़ता जा रहा था। बढ़ते तनाव की पृष्ठभूमि में यह हिंसक झड़प हुई हैं। ये तनाव छह नागा नागरिकों की हत्या के बाद पैदा हुआ है, जिनके शव 13 मई को कथित तौर पर अपहरण किए जाने के बाद 11 जून को कांगपोकपी जिले से बरामद किए गए थे।
नई शत्रुता की हुई शुरुआत
इस घटना के बाद व्यापक विरोध प्रदर्शनों, आर्थिक नाकाबंदी और दोनों समुदायों के बीच नए सिरे से शत्रुता को जन्म दिया। यह ताजा हिंसा कुकी-बहुल क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं के काफिले की आवाजाही को लेकर हाल के विवादों और विभिन्न संगठनों द्वारा किए गए प्रदर्शनों के बाद हुई है।
गनीमत की बात रही कि बुधवार की हुई हिंसक झड़प में आधिकारिक तौर पर किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली है। कुकी इनपी मणिपुर (KIM) ने इस ताजा आतंकी कृत्य की कड़ी निंदा की है, जिसमें कामजोंग जिले के एक कुकी गांव को नागा समूहों के सशस्त्र आतंकवादियों ने जलाकर राख कर दिया था।
ये हिंसा सोची-समझी साजिश का हिस्सा – KIM
KIM ने एक बयान में कहा है कि यह हालिया हमला, मणिपुर के तंगखुल-बहुल पहाड़ी जिलों में कुकी गांवों को निशाना बनाकर की जा रही हिंसा और तबाही की एक सोची-समझी मुहिम का ही हिस्सा है। इस घटना को और भी चिंताजनक बात यह बनाती है कि गांव सुरक्षा बलों की सुरक्षा में था, फिर भी आगजनी की घटना से ठीक एक दिन पहले ही सुरक्षाकर्मियों ने अपनी चौकी खाली कर दी थी। घटना का समय संवेदनशील गांवों में सुरक्षा इंतजामों को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करता है और हमले की वजहों की तुरंत और पारदर्शी जांच की जरूरत पर जोर देता है।
इस बीच, छह नागा नागरिकों की हत्याओं पर खेद व्यक्त किया था। कुकी-जो परिषद (KZC) के अध्यक्ष हेनलियानथांग थांगलेट ने हाल ही में इस घटना के लिए माफी मांगी थी। उन्होंने राज्य में जारी जातीय अशांति से जुड़ी सभी हिंसा की घटनाओं की निष्पक्ष, पारदर्शी और तटस्थ जांच की मांग की।