20 लाख में बनता था ऑनलाइन सट्टा ऐप! महादेव मॉडल पर देशभर में फैला करोड़ों का नेटवर्क, चार्जशीट में बड़ा खुलासा

महादेव ऐप

रायपुर पुलिस द्वारा महादेव सट्टा ऐप मामले में अदालत में पेश की गई चार्जशीट में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि आरोपियों ने चर्चित महादेव मॉडल की तर्ज पर अपने निजी ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म तैयार कर करोड़ों रुपये के सट्टा कारोबार का संचालन किया। यह नेटवर्क केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं था, बल्कि देश के कई राज्यों तक फैला हुआ था।

जांच एजेंसियों के अनुसार, ऑनलाइन बेटिंग के इस नेटवर्क में तकनीक, बैंकिंग सिस्टम और डिजिटल ट्रांजेक्शन का इस्तेमाल कर बड़े स्तर पर कारोबार संचालित किया जा रहा था। पुलिस ने मुख्य आरोपी सकी दरडा उर्फ बाबू खेमानी सहित कई आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।

कैसे काम करता था पूरा नेटवर्क?

जांच में सामने आया कि आरोपी खुद के बेटिंग प्लेटफॉर्म तैयार करवाकर विभिन्न स्तरों पर एजेंट और ऑपरेटर नियुक्त करते थे। सभी लोग आपसी समन्वय से पूरे नेटवर्क का संचालन करते थे।

नेटवर्क के संचालन में मुख्य रूप से शामिल थे—

  • ऑनलाइन बेटिंग ऐप
  • पैनल और स्टेशन सिस्टम
  • एजेंट नेटवर्क
  • बैंक खातों के जरिए लेन-देन
  • डिजिटल ट्रांसफर और क्रिप्टोकरेंसी

पुलिस के अनुसार, यह सिस्टम बेहद व्यवस्थित तरीके से काम करता था।

20 लाख रुपये में तैयार होता था बेटिंग ऐप

जांच में यह भी सामने आया कि एक सामान्य ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म तैयार करने में करीब 20 लाख रुपये तक खर्च होता था।

वहीं अधिक सुविधाओं वाले एडवांस प्लेटफॉर्म तैयार करने की लागत 50 लाख रुपये तक पहुंच जाती थी। इनमें कई तरह की तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती थीं, जैसे—

  • पॉइंट सिस्टम
  • एडमिन पैनल
  • मल्टी यूजर एक्सेस
  • गेम मैनेजमेंट फीचर
  • डिजिटल भुगतान प्रबंधन

बताया जा रहा है कि कुछ बड़े ऑपरेटर ऐसे प्लेटफॉर्म खुद तैयार करवाते थे।

म्यूल अकाउंट के जरिए होता था लेन-देन

चार्जशीट में दावा किया गया है कि लेन-देन के लिए सीधे अपने बैंक खातों का उपयोग नहीं किया जाता था। इसके बजाय दूसरे लोगों के नाम पर खुले बैंक खातों का उपयोग किया जाता था।

ऐसे खातों को आम तौर पर “म्यूल अकाउंट” कहा जाता है।

इन खातों का उपयोग—

  • रकम जमा करने,
  • पैसे निकालने,
  • और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था।

इससे वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचना कठिन हो जाता था।

क्रिप्टोकरेंसी में बदल दी जाती थी रकम

जांच के दौरान यह भी जानकारी सामने आई कि बैंक खातों में जमा राशि को बाद में डिजिटल करेंसी में बदला जाता था।

विशेष रूप से USDT जैसी क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल कथित तौर पर धन को डिजिटल वॉलेट तक पहुंचाने के लिए किया जाता था। इसके बाद रकम को अन्य खातों या प्लेटफॉर्म तक भेजा जाता था।

कई राज्यों तक फैला था नेटवर्क

जांच एजेंसियों के अनुसार, यह नेटवर्क केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं था। इसके तार कई राज्यों से जुड़े होने की जानकारी सामने आई है।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

  • छत्तीसगढ़
  • झारखंड
  • महाराष्ट्र
  • गोवा
  • अन्य राज्य

बताया जा रहा है कि राज्य में 261 से अधिक लोग इस नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं।

महादेव मॉडल से क्यों हो रही तुलना?

जांच एजेंसियों का कहना है कि इस नेटवर्क की कार्यप्रणाली और कथित महादेव मॉडल में कई समानताएं दिखाई देती हैं।

इनमें शामिल हैं—

  • ऑनलाइन बेटिंग ऐप,
  • एजेंट आधारित सिस्टम,
  • बैंक खातों के जरिए लेन-देन,
  • और डिजिटल मुद्रा के माध्यम से भुगतान व्यवस्था।

इसी वजह से जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं।

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