कलेक्ट्रेट घेराव
धमतरी जिले में सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर दो बड़े प्रदर्शन देखने को मिले। एक ओर स्कूलों में पाठ्यपुस्तकों की कमी को लेकर अशासकीय शिक्षकों ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया, वहीं दूसरी ओर प्रदेश मितानिन संघ के बैनर तले सैकड़ों मितानिनों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। दोनों संगठनों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए जल्द समाधान नहीं होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।
किताबों की कमी से प्रभावित हो रही बच्चों की पढ़ाई
नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के कई सप्ताह बाद भी जिले के कई स्कूलों में छात्रों को आवश्यक पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। इसी मुद्दे को लेकर जिले के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में अशासकीय शिक्षक कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रदर्शन किया।
शिक्षकों का कहना है कि किताबों की अनुपलब्धता का सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। बिना पुस्तकों के पढ़ाई सुचारू रूप से संचालित नहीं हो पा रही है और बच्चों की पढ़ाई पिछड़ने लगी है।
शिक्षकों की प्रमुख मांगें
- सभी स्कूलों में तत्काल पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
- पुस्तक वितरण प्रक्रिया को तेज किया जाए।
- भविष्य में शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले ही किताबों की आपूर्ति पूरी की जाए।
- विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने से रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाए।
प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने नारेबाजी करते हुए अपनी नाराजगी जताई और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो रायपुर स्थित पाठ्यपुस्तक निगम कार्यालय का घेराव किया जाएगा।
मितानिनों ने भी खोला आंदोलन का मोर्चा
इधर प्रदेश मितानिन संघ के नेतृत्व में जिले भर की सैकड़ों मितानिनें भी अपनी मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचीं। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को पूरा करने की अपील की।
मितानिनों का कहना है कि वे वर्षों से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान अब तक नहीं हो पाया है।
मितानिनों की तीन प्रमुख मांगें
- एमटी, बीसी और एचएफ कर्मचारियों का राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में संविलियन।
- क्षतिपूर्ति मानदेय में 50 प्रतिशत की वृद्धि।
- स्वास्थ्य सेवाओं में लागू ठेका प्रथा को समाप्त किया जाए।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इन मांगों को चुनाव के दौरान किए गए वादों और गारंटियों में शामिल किया गया था, लेकिन अब तक उन पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
प्रशासन ने दिया जल्द समाधान का भरोसा
दोनों संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपा। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को शासन तक पहुंचाया जाएगा और आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रस्ताव अग्रेषित किया जाएगा।
हालांकि प्रदर्शनकारी संगठनों का कहना है कि यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को प्रदेश स्तर तक विस्तारित किया जाएगा।
जिले में बढ़ रहा जनआंदोलनों का दबाव
एक ही दिन में शिक्षकों और मितानिनों के प्रदर्शन ने जिले में प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़े कर्मचारियों की नाराजगी सरकार और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग इन मांगों पर कितनी जल्दी निर्णय लेते हैं और प्रदर्शनकारियों को राहत मिलती है या नहीं।