बच्चों की सुरक्षा
बारिश का मौसम शुरू होते ही शहरों और कॉलोनियों में खुले गड्ढे, निर्माणाधीन स्थल और पानी से ढकी नालियां बच्चों के लिए बड़ा खतरा बनकर सामने आ रही हैं। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने इस गंभीर स्थिति को देखते हुए नगरीय प्रशासन विभाग, जिला कलेक्टरों और नगरीय निकायों को तत्काल सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने स्पष्ट कहा है कि बारिश के दौरान खुले गड्ढों और जलभराव वाले क्षेत्रों में बच्चों के गिरने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिनमें कई मासूम अपनी जान तक गंवा चुके हैं। इसे बच्चों के जीवन और सुरक्षा से जुड़ा बेहद संवेदनशील विषय बताते हुए आयोग ने त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
बारिश में क्यों बढ़ जाता है खतरा?
मानसून के दौरान निर्माणाधीन गड्ढों और सड़कों पर बने बड़े-बड़े खड्डों में पानी भर जाता है। ऊपर से देखने पर इनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। स्कूल आने-जाने वाले बच्चे और खेलते समय बाहर निकलने वाले मासूम अक्सर इन्हें सामान्य जलभराव समझ लेते हैं और हादसे का शिकार हो जाते हैं।
खासकर इन स्थानों पर खतरा सबसे ज्यादा रहता है:
- निर्माणाधीन कॉलोनियां और भवन
- सड़क निर्माण वाले क्षेत्र
- खुली नालियां और सीवर लाइन
- बारिश के पानी से भरे गहरे गड्ढे
- खाली प्लॉट और खुदाई वाले स्थल
आयोग ने जारी किए सख्त निर्देश
छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम 2005 के प्रावधानों के तहत बच्चों के जीवन और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।
मुख्य निर्देशों में शामिल हैं:
- नगरीय क्षेत्रों में विशेष सर्वे अभियान चलाया जाए।
- खुले गड्ढों और खतरनाक स्थलों की तत्काल पहचान की जाए।
- संभव हो तो गड्ढों को तुरंत भरने की कार्रवाई की जाए।
- जिन स्थानों को तुरंत भरना संभव नहीं है, वहां मजबूत बैरिकेडिंग की जाए।
- बल्ली, जाली या अन्य सुरक्षा घेरा लगाकर बच्चों की पहुंच रोकी जाए।
- निर्माणाधीन स्थलों पर चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं।
- संवेदनशील क्षेत्रों में चौकीदार या सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएं।
निर्माण एजेंसियों और कॉलोनियों की भी जिम्मेदारी
आयोग ने निर्माण एजेंसियों, ठेकेदारों और आवासीय कॉलोनियों के संचालकों को भी जिम्मेदार ठहराया है। निर्देश दिए गए हैं कि निर्माण कार्यों के लिए खोदे गए गड्ढों को खुला छोड़ना गंभीर लापरवाही माना जाएगा।
निर्माण स्थलों पर:
- मजबूत सुरक्षा घेरा लगाया जाए।
- बच्चों की आवाजाही वाले रास्तों को सुरक्षित बनाया जाए।
- चेतावनी संकेत और रिफ्लेक्टर लगाए जाएं।
- नियमित निगरानी की व्यवस्था की जाए।
जिला स्तर पर होगी साप्ताहिक समीक्षा
आयोग ने जिला कलेक्टरों और नगरीय निकायों के वरिष्ठ अधिकारियों से कहा है कि इस विषय को नियमित समीक्षा बैठकों में शामिल किया जाए। साथ ही सभी संबंधित विभागों को तत्काल दिशा-निर्देश जारी कर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
7 जुलाई तक मांगी गई रिपोर्ट
आयोग ने सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों को निर्देशों पर की गई कार्रवाई की विस्तृत जानकारी 7 जुलाई 2026 तक लिखित रूप में उपलब्ध कराने के लिए कहा है।
बारिश के मौसम में छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ऐसे में प्रशासन, निर्माण एजेंसियों और आम नागरिकों की संयुक्त जिम्मेदारी है कि बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जाए और खुले गड्ढों को किसी भी कीमत पर दुर्घटना का कारण न बनने दिया जाए।